ईरान में उबाल, देश से लेकर विदेश तक सरकार के खिलाफ तेज हुआ विरोध

KNEWS DESK- ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बीते कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब और उग्र हो गए हैं। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और कई जगहों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। यह गुस्सा अब सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विदेशों में भी ईरानी सरकार के खिलाफ विरोध देखने को मिल रहा है।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन से सामने आए एक वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। केंसिंग्टन इलाके में स्थित ईरानी दूतावास की इमारत पर एक प्रदर्शनकारी चढ़ गया और वहां लगे मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक के झंडे को उतार दिया। उसकी जगह 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले का शेर और सूरज वाला ईरानी झंडा फहरा दिया गया।

इस दौरान दूतावास के बाहर मौजूद बड़ी संख्या में सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारी तालियां बजाते और नारे लगाते नजर आए। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, यह झंडा कुछ मिनटों तक इमारत पर लगा रहा, जिसके बाद उसे हटा दिया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति इमारत पर चढ़ता है और ऊपर पहुंचकर मौजूदा ईरानी शासन का झंडा उतार देता है। इसके बाद वह उसकी जगह शेर और सूरज के प्रतीक वाला पुराना झंडा लगा देता है। इमारत के बाहर जमा सैकड़ों लोग भी इसी झंडे को लहराते हुए इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि मौके पर पहुंचकर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका है कि झंडा उतारने वाला व्यक्ति गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल है या नहीं।

जिस शेर और सूरज वाले झंडे को दूतावास पर फहराया गया, उसका ईरान के इतिहास में खास महत्व रहा है। यह झंडा लंबे समय तक ईरान की राजशाही का प्रतीक रहा और 1979 की इस्लामी क्रांति तक आधिकारिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। शाह के सत्ता से हटने के बाद नई धार्मिक सरकार ने इसकी जगह मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक का झंडा अपनाया।

इसके बाद से यह झंडा मुख्य रूप से राजशाही समर्थकों और मौजूदा शासन के विरोध में खड़े ईरानी प्रवासी समुदाय के कुछ वर्गों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालिया प्रदर्शनों के दौरान यह झंडा एक बार फिर विरोध का बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है।

ईरान में मौजूदा विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे। शुरुआत में आर्थिक परेशानियों और महंगाई को लेकर तेहरान में दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। इसके बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में फैल गया। अब प्रदर्शनकारी खुलकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पेरिस, बर्लिन समेत यूरोप के कई बड़े शहरों में एकजुटता रैलियां निकाली गई हैं। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में भी व्हाइट हाउस के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। समाचार एजेंसी एपी (AP) के मुताबिक, अब तक इन प्रदर्शनों में कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

प्रदर्शनों के तेज होने के बाद ईरानी सरकार ने देश में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी सामने आया है। ट्रंप लगातार ईरानी शासन को चेतावनी दे रहे हैं और कह चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका प्रदर्शनकारियों की रक्षा करेगा।

शुक्रवार को वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा, “ईरान बड़ी मुसीबत में है। लोग ऐसे शहरों पर नियंत्रण कर रहे हैं, जिनके बारे में कुछ हफ्ते पहले कोई सोच भी नहीं सकता था। हम हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरानी शासन बड़े पैमाने पर हिंसा का सहारा लेता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा।

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