यूपी भाजपा के चाणक्य की वो व्यूहरचना जिसे विपक्षी नहीं भेद पाए

1952 राष्ट्रीय राजनीतिक जनचेतना को जगाने के लिए जनसंघ बना जिसकी अगुवाई श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीन दयाल उपाध्याय ने की. किंतु कांग्रेस की राजनीतिक कूटनीति को देखते हुए 1980 में जनसंघ को एक नया स्वरूप दिया गया ‘भारतीय जनता पार्टी’ जिसकी स्थापना भारत में एक राजनितिक विकल्प के तौर पर की गई.

जिसके संस्थापक भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई भी उत्तर प्रदेश की ही धरती से थे ,देश में सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाला राज्य उत्तर प्रदेश ही है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम श्री कृष्ण, बुद्ध और हजरत निजामुद्दीन औलिया की इस भूमि में देश को नेतृत्व देने की अपार संभावनाएं रही , जिसको देखते हुए संघ के 5वें सरसंघचालक के तौर पर प्रोफेसर राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रज्जू भैया को संघ की कमान सौंपी गई । जिसके बाद पुनः उत्तर प्रदेश में जन्मे पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया क्योंकि देश की सत्ता और भारत की संस्कृति की पुनर्स्थापना का मार्ग उत्तर प्रदेश से ही दिखता है इसीलिए 2013 में राजनाथ सिंह को तीसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और उनकी टीम में अमित शाह को  बतौर राष्ट्रीय महामंत्री व उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया लक्ष्य एक था भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल कराना और उत्तर प्रदेश में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण, काशी में भव्य श्रृंगार, मथुरा की होली की जय जय कार । यह सब तभी संभव था जब नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री पद के दावेदार उत्तर प्रदेश की किसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़े ऐसा प्रस्ताव रखा गया,इन सब की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी संघ के सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल के साथ अमित शाह बतौर प्रभारी दी गई लेकिन इस योजना को सफल बनाने के लिए एक चाणक्य दांव की जरुरत थी ऐसे में एक नाम सामने आया जिसकी कार्यकुशलता से न केवल विद्यार्थी परिषद अपितु विद्यार्थी संगठन और राजनीतिक संगठन  भलीभांति परिचित था और चुनाव किया गया जिसके परिणाम स्वरूप अक्टूबर 2013 में सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश का सह प्रभारी नियुक्त किया गया ।

सह प्रभारी के रूप में सुनील बंसल ने 2014 लोकसभा आम चुनाव में अपनी सांगठनिक क्षमता का दिखाई जिसके परिणाम यह रहे कि 2014 लोकसभा के आम चुनाव में भाजपा को 71 सीटें व गठबंधन को 2 सीटें प्राप्त हुई भाजपा ने गठबंधन के साथ मिलकर इतिहास रचा । जिसके बाद जुलाई 2014 में बतौर संगठन महामंत्री उत्तर प्रदेश भाजपा सुनील बंसल की नियुक्ति की गयी,केंद्रीय नेतृत्व के इस विश्वास के साथ सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश भाजपा का संगठन महामंत्री नियुक्त किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा स्थाई रूप से स्थापित हो और 2014 की ही तरह आगे पार्टी का प्रदर्शन जारी रहे । सुनील बंसल ने केंद्रीय नेतृत्व की मंशा को समझते हुए उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा को स्थापित करने के लिए काम शुरू किया ऐसी स्थिति में यूपी में भाजपा को आवश्यकता थी एक जुझारू ओबीसी चेहरे की जो  बतौर  प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भाजपा को उत्तरप्रदेश में स्थापित करें और 2017 विधानसभा आम चुनाव में बहुमत के साथ सत्ता प्राप्त करे । सुनील बंसल ने यह सुझाव केंद्रीय नेतृत्व को दिया और केंद्रीय नेतृत्व ने निर्णय सुनील बंसल पर छोड़ दिया ।सुनील बंसल ने ओबीसी चेहरे केशव प्रसाद मौर्य को अप्रैल 2016 में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया, उसके बाद संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने उत्तर प्रदेश की संगठनात्मक व्यूह रचना का निर्माण इस प्रकार से किया जिससे उत्तर प्रदेश के 1,53,8,97 बूथों तक भाजपा का संगठन न केवल स्थापित किया बल्कि बूथ स्तर पर संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को प्रशिक्षित व सशक्त भी किया । जिसका बहुत बड़ा उदाहरण कोविड 19 के दौरान जनसेवा के रूप में या फिर  भाजपा संगठन उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं द्वारा “सेवा ही संगठन” का अभियान चलाकर जन जन तक भाजपा की विचारधारा को पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया । इसी बूथ संरचना के सहयोग से फरवरी 2017 में भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपना ऐसा परचम लहराया दशकों से सत्ता के लिए जूझती भाजपा को उत्तर प्रदेश में स भाजपा को विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित 325 सीटें प्राप्त हुई और पूर्ण बहुमत की सरकार बनी साथ ही यह जीत का सिलसिला 2017 नगर पंचायत चुनाव  अप्रत्याशित सफलता 2018 उत्तर प्रदेश सहकारिता का चुनाव, 2019 शिक्षक व स्नातक विधान परिषद चुनाव, 2019 आम लोकसभा चुनाव,2021 जिला पंचायत चुनाव, 2021 में पुनःएमएलसी चुनाव को अपनी व्यूह रचना व संगठनात्मक क्षमता के साथ पार्टी को सफलता दिलाई

 

 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा का आम चुनाव भाजपा के साथ-साथ सुनील बंसल के सामने बड़ी चुनौती थी दोबारा सत्ता में वापसी के साथ साथ विपक्ष के महागठबंधन के व्यूह को तोड़ने की और सुनील बंसल ने अपने संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए 2022 विधानसभा आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में दोबारा भाजपा को सत्ता दिलाई। इसके बाद 2022 में सपा का गढ़ कहे जाने वाले रामपुर व आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में पर्दे के पीछे रहकर अपनी व्यूह रचना से विपक्ष को ऐसा गिराया कि भाजपा ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की। बीजेपी यूपी बतौर सह प्रभारी और संगठन महामंत्री के रूप में इन 8 सालों में पर्दे के पीछे के हीरो  सुनील बंसल ने  भाजपा को उत्तरप्रदेश में स्थापित ही नहीं किया अपितु पर्दे के पीछे रहकर संगठन के अनुशासन को स्थापित करने पर जोर देते हुए केन्द्रीय नेतृत्व के सपनों को साकार  किया ।

अगर हम भविष्य की तरफ देखें  तो शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जिस हिसाब से सुनील बंसल ने पूरे जिम्मेदारी के साथ जीता है उसी को देखते हुए जानकारों का कहना है कि भाजपा को उत्तरप्रदेश में स्थापित करने वाले सुनील बंसल को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है राष्ट्रीय संगठन महामंत्री राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री या फिर राष्ट्रीय महासचिव भारतीय जनता पार्टी की जिम्मेदारी के साथ साथ उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों का प्रभार भी मिल सकता है जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि सुनील बंसल ने यूपी में जिस तरह से भाजपा को स्थापित किया है उसके परिणाम  स्वरुप  केंद्रीय नेतृत्व उनका अगस्त माह में कद बढ़ाएगा और जिम्मेदारियां भी राष्ट्रीय स्तर पर देगा जिसमें उत्तर प्रदेश में सुनील बंसल का हस्तक्षेप हमेशा रहेगा उसके साथ-साथ तेलंगाना गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में भी इनका आम चुनाव में अहम रोल होगा कुछ भाजपा समर्थक तो यहां तक कह रहे हैं कि सुनील बंसल के उत्तर प्रदेश से जाने के बाद स्थितियां बदल सकती हैं सुनील बंसल जेसी  अद्भुत और अकल्पनीय संगठनात्मक क्षमता किसी में नहीं है जिस तरह से उन्होंने उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को अपनी संगठनात्मक क्षमता के अनुसार 2017,2019 और 2022 आम चुनाव के साथ कई छोटे चुनाव में भाजपा  का परचम लहराया है वह शायद ही किसी भाजपा के संगठन महामंत्री या पदाधिकारी के लिए संभव हो ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व सुनील बंसल का कद तो बढ़ाएगा ही लेकिन साथ ही  ऐसी  उम्मीद है  कि उत्तर प्रदेश में उनका हस्तक्षेप बराबर रखेगा

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