Knews Desk- पटना के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में शिक्षक और यूट्यूबर फैसल खान उर्फ खान सर को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने खान सर और उनके बॉडीगार्ड्स की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। यह मामला एक कोचिंग संस्थान में हुए विवाद, कथित फायरिंग और हिंसा से जुड़ा हुआ है।
मामले की सुनवाई पटना की अदालत में चल रही थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने खान सर और उनके सुरक्षा कर्मियों को गिरफ्तारी से राहत दे दी। इससे पहले अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। यह विवाद पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र में स्थित दो कोचिंग संस्थानों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है। एक पक्ष खान सर के कोचिंग संस्थान का है, जबकि दूसरा पक्ष कोचिंग संचालक रोशन आनंद से जुड़ा बताया जा रहा है। दोनों संस्थानों के बीच छात्रों की संख्या, रिजल्ट और टॉपर्स को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
जून महीने में खान सर के कोचिंग सेंटर पर कथित हमले, तोड़फोड़ और पथराव की घटना सामने आई थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान खान सर और उनके बॉडीगार्ड्स के नाम भी केस में शामिल किए गए। पुलिस जांच में खान सर के दो बॉडीगार्ड्स की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोप था कि विवाद के दौरान फायरिंग की घटना हुई थी। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी और उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी। खान सर की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उनका इस घटना से सीधा कोई संबंध नहीं है और वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उनके वकील ने कहा कि लगाए गए आरोपों के आधार पर गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। वहीं, विरोधी पक्ष ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया था।
सुनवाई के दौरान हथियारों के लाइसेंस और बॉडीगार्ड्स से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा हुई। खान सर के पक्ष ने अदालत को बताया कि सुरक्षा कर्मियों के हथियारों से जुड़े लाइसेंस नियमों के अनुसार हैं। अदालत से अग्रिम जमानत मिलने के बाद खान सर को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। हालांकि, पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। इस पूरे विवाद ने पटना के कोचिंग सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सुरक्षा व्यवस्था और संस्थानों के बीच विवाद को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें इस मामले में पुलिस जांच की आगे की कार्रवाई और कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।