काशी विश्वनाथ धाम में ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का जलवा, परंपरा और तकनीक का अनोखा संगम बना आकर्षण, दुनिया की पहली घड़ी काशी में स्थापित

शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ धाम में इन दिनों एक खास आकर्षण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ नाम की यह अनोखी घड़ी न सिर्फ श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है, बल्कि भारत की प्राचीन समय गणना प्रणाली को भी आधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत कर रही है। करीब 700 किलो वजनी यह घड़ी परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम मानी जा रही है। इस विशेष घड़ी को मोहन यादव की ओर से भेंट किया गया है और हाल ही में योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में एक समारोह के दौरान इसे औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इसके स्थापित होने के बाद मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को अब एक नई तरह का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिल रहा है।

वैदिक पंचांग के आधार पर समय बताती है विशेष घड़ी

‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को दुनिया की पहली ऐसी घड़ी बताया जा रहा है, जो पारंपरिक वैदिक पंचांग के आधार पर समय दर्शाती है। यह आम 24 घंटे की ग्रेगोरियन प्रणाली से अलग है। इस घड़ी की खासियत यह है कि इसमें दिन की शुरुआत आधी रात से नहीं, बल्कि सूर्योदय से मानी जाती है और अगले सूर्योदय के साथ दिन समाप्त होता है। यह घड़ी दिन को 30 ‘मुहूर्तों’ में विभाजित करती है, जिसमें हर एक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है। सूर्योदय के समय घड़ी 0:00 से शुरू होती है और सूर्यास्त आमतौर पर 15वें मुहूर्त के आसपास होता है। इसके अलावा यह घड़ी स्थानीय माध्य समय (Local Mean Time) भी दिखाती है, जो सूर्य की वास्तविक स्थिति के आधार पर तय होता है। इससे किसी विशेष स्थान के लिए समय की गणना और अधिक सटीक हो जाती है।

समय के अलावा तिथि, नक्षत्र, कलाएं और ग्रहण की भी मिलती है जानकारी

घड़ी की एक और खासियत यह है कि यह ‘तिथि’ (चंद्र दिवस), ‘नक्षत्र’ (तारामंडल), चंद्रमा की कलाएं, ग्रहण और अन्य ज्योतिषीय गणनाओं की जानकारी भी देती है। इतना ही नहीं, यह एक ही समय पर IST और GMT भी प्रदर्शित करती है, जिससे पारंपरिक और आधुनिक समय प्रणालियों के बीच संतुलन बना रहता है। मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्रा के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सनातन परंपराओं और वैदिक ज्ञान से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि मौसम विज्ञान और ज्योतिष से जुड़े अध्ययनों में यह पाया गया है कि वैदिक समय गणना पर आधारित कुछ भविष्यवाणियां आधुनिक प्रणालियों की तुलना में 20 से 23 प्रतिशत तक अधिक सटीक हो सकती हैं।

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