Knews Desk– गुजरात के अहमदाबाद ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने मियावाकी तकनीक की मदद से महज एक घंटे में 3.61 लाख पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. यह अभियान शहर के भदाज क्षेत्र में चलाया गया, जिसमें 25,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया. 76,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 प्रजातियों के देशी पौधे लगाए गए. इस उपलब्धि ने न केवल अहमदाबाद को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि मियावाकी तकनीक को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया. आखिर यह तकनीक क्या है और इससे इतने कम समय में इतने अधिक पौधे कैसे लगाए जा सके, आइए जानते हैं.मियावाकी तकनीक का विकास जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी ने किया था. इस तकनीक का उद्देश्य कम जगह में कम समय के भीतर घने और प्राकृतिक जंगल तैयार करना है. पारंपरिक तरीके से लगाए गए पेड़ों की तुलना में मियावाकी तकनीक से तैयार जंगल लगभग 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और करीब 30 गुना अधिक घने होते हैं. यही वजह है कि आज दुनिया के कई देशों में शहरी क्षेत्रों को हराभरा बनाने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है.
इस तकनीक में सबसे पहले मिट्टी की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है और उसमें जैविक खाद, गोबर, भूसा, नारियल के रेशे तथा अन्य प्राकृतिक पदार्थ मिलाकर उसे पौधों के अनुकूल बनाया जाता है. इसके बाद स्थानीय जलवायु के अनुसार देशी प्रजातियों के पौधों का चयन किया जाता है. एक वर्ग मीटर क्षेत्र में तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं, जिससे वे आपस में प्रतिस्पर्धा करते हुए तेजी से ऊपर की ओर बढ़ते हैं और कुछ वर्षों में घने जंगल का रूप ले लेते हैं.अहमदाबाद में इसी वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल करते हुए 35 प्रकार के देशी पौधों का रोपण किया गया. बड़ी संख्या में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को पहले से अलग-अलग समूहों में बांटा गया था, जिससे निर्धारित समय के भीतर पूरे क्षेत्र में तेजी से पौधे लगाए जा सके. इस सुनियोजित अभियान के कारण केवल एक घंटे में 3.61 लाख पौधों का रोपण संभव हो सका और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया.
यह अभियान केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है. यह गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 1.25 करोड़ और अहमदाबाद शहर में 50 लाख पौधे लगाने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है. कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी रही. उनके अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राज्य भाजपा अध्यक्ष, शहरी विकास एवं आवास मंत्री, अहमदाबाद के मेयर, नगर आयुक्त और कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे.विशेषज्ञों का मानना है कि मियावाकी तकनीक तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी समाधान बन सकती है. यह तकनीक वायु प्रदूषण कम करने, कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने, जैव विविधता बढ़ाने और स्थानीय तापमान को नियंत्रित रखने में भी मददगार साबित होती है. इसके अलावा ऐसे जंगल पक्षियों, तितलियों और अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास भी तैयार करते हैं.
आज भारत के कई शहरों में पार्कों, खाली सरकारी जमीनों, स्कूल परिसरों और औद्योगिक क्षेत्रों में मियावाकी जंगल विकसित किए जा रहे हैं. अहमदाबाद की यह उपलब्धि दिखाती है कि यदि वैज्ञानिक तकनीक, जनभागीदारी और प्रशासनिक योजना साथ आएं तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े लक्ष्य भी कम समय में हासिल किए जा सकते हैं.