इजराइल चुनाव में नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट, ट्रंप की एंट्री से गठबंधन की चर्चा तेज

Knews Desk– इजराइल की राजनीति में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में नेतन्याहू को पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट से कड़ी चुनौती मिलने की बात कही जा रही है। चुनावी सर्वेक्षणों में आइजेनकोट को नेतन्याहू से आगे बताया जा रहा है। हालांकि, चुनाव में पीछे रहने के बावजूद नेतन्याहू दोबारा प्रधानमंत्री बन सकते हैं। ऐसा तब संभव है, जब किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिलता और राजनीतिक दलों के बीच सत्ता साझा करने को लेकर समझौता हो जाता है।

इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। यदि नेतन्याहू और आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधनों में से किसी को भी बहुमत नहीं मिलता है, तो सरकार गठन के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन लेना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में दोनों नेता मिलकर साझा सरकार बनाने पर विचार कर सकते हैं। इसके तहत प्रधानमंत्री पद को बारी-बारी से संभालने का विकल्प भी सामने आ सकता है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच मतभेदों को देखते हुए इस तरह के समझौते पर सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के चुनाव में नेतन्याहू का खुलकर समर्थन किया है। 18 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर ट्रंप ने नेतन्याहू को मजबूत प्रधानमंत्री बताते हुए ईरान के खिलाफ लड़ाई में अपना साझेदार कहा था। रविवार को भी उन्होंने नेतन्याहू के समर्थन को दोहराया। वहीं, नेतन्याहू ने अमेरिकी अधिकारियों से कथित तौर पर कहा है कि यदि वह आइजेनकोट के साथ सरकार बनाते हैं, तो कट्टर दक्षिणपंथी नेता इतामार बेन ग्विर जैसे सहयोगियों को सरकार से बाहर किया जा सकता है। इससे संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

दूसरी ओर, गादी आइजेनकोट ने नेतन्याहू की सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले को रोकने में नाकाम रही और गाजा तथा लेबनान में युद्ध खत्म करने में भी सफल नहीं हुई।

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