मालदा बाढ़ मुआवजा घोटाला: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 100 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार पर CAG से मांगी रिपोर्ट

डिजिटल डेस्क- कलकत्ता हाई कोर्ट ने उत्तर बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ पीड़ितों को दिए गए मुआवजे में कथित 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को गंभीरता से लेते हुए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि जांच पूरी होने के बावजूद CAG रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन और पंचायत स्तर के अधिकारियों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ कर रही है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगली तारीख पर CAG को यह बताना होगा कि रिपोर्ट को प्रकाशित करने में क्या कानूनी या प्रशासनिक बाधा है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को तय की गई है।

कथित घोटाले में 80 से अधिक प्रधान और अधिकारी शामिल

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 2017 में आई बाढ़ के बाद मुआवजा वितरण में भारी गड़बड़ी की गई। आरोप है कि वास्तविक बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिला, जबकि रकम ऐसे लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिनका बाढ़ से कोई लेना-देना नहीं था। वकील ने दावा किया कि इस कथित घोटाले में पूरे जिले के कम से कम 80 पंचायत प्रधान और कई सरकारी अधिकारी शामिल हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि CAG की दूसरी जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार से जुड़े ठोस दस्तावेज और विस्तृत जानकारी मौजूद है, जिसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। हालांकि, CAG की ओर से अदालत को बताया गया कि रिपोर्ट को प्रकाशित नहीं किया जा सकता।

2017 में आई बाढ़ पर है घोटाले का आरोप

इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि CAG राज्य सरकार से मिलीभगत कर रिपोर्ट को दबाने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में मालदा जिले के कई इलाकों में भीषण बाढ़ आई थी। राज्य सरकार का दावा है कि उस समय लगभग 14,000 बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा दिया गया था। बाद में स्थानीय पंचायतों पर मुआवजे के नाम पर धन की हेराफेरी के आरोप सामने आए, जिसके बाद इस पूरे मामले की जांच की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी।

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