KNEWS DESK- फरवरी में महाशिवरात्रि मनाई जा चुकी है और साल का पहला सूर्य ग्रहण भी बीत चुका है, लेकिन इस महीने की सबसे खास तारीख अभी बाकी है। 19 फरवरी 2026 को एक साथ चार महत्वपूर्ण अवसर पड़ रहे हैं, जो इसे आस्था और उत्सव के लिहाज से बेहद विशेष बनाते हैं। यह दिन हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए खास महत्व रखता है।
19 फरवरी से शुरू हो सकता है रमजान
इस्लाम का पवित्र महीना रमजान चांद दिखने के साथ शुरू होता है। संभावना है कि भारत में 19 फरवरी 2026 से रमजान की शुरुआत हो। रमजान शुरू होते ही मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं, नमाज अदा करते हैं और जरूरतमंदों को जकात देते हैं। यह महीना संयम, इबादत और आत्मचिंतन का प्रतीक है।
एक महीने के रोजों के बाद ईद-उल-फितर मनाई जाती है, जिसे रोजों का इनाम कहा जाता है। इस वर्ष ईद 19 या 20 मार्च को मनाई जा सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय चांद के दीदार पर निर्भर करेगा।
फुलैरा दूज: फूलों की होली का शुभारंभ
19 फरवरी को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जिसे फुलैरा दूज कहा जाता है। ब्रज क्षेत्र, विशेषकर मथुरा और वृंदावन में यह पर्व बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दिन राधा और कृष्ण का भव्य पुष्प श्रृंगार किया जाता है और फूलों की होली खेली जाती है। यह होली के उत्सव का कोमल और प्रेममय आरंभ माना जाता है।
छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती
19 फरवरी को मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती भी मनाई जाएगी। महाराष्ट्र में यह दिन अत्यंत उत्साह और गौरव के साथ मनाया जाता है। जगह-जगह शोभायात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ऐतिहासिक झांकियां निकाली जाती हैं। शिवाजी महाराज को वीरता, स्वाभिमान और सुशासन के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
श्री रामकृष्ण परमहंस जयंती
इसी दिन महान संत और आध्यात्मिक गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस की 191वीं जयंती भी है। उन्होंने भक्ति, साधना और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश दिया। पश्चिम बंगाल स्थित बेलूर मठ में इस अवसर पर विशेष पूजा और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आस्था और एकता का संदेश
19 फरवरी 2026 का दिन प्रेम, भक्ति, वीरता, आध्यात्मिक चेतना और इबादत का अद्भुत संगम लेकर आ रहा है। एक ओर रमजान की शुरुआत, तो दूसरी ओर फुलैरा दूज, शिवाजी जयंती और रामकृष्ण जयंती—यह तारीख सच में इस महीने की सबसे “हैपनिंग” और यादगार तारीख बनने जा रही है। यह दिन हमें विविधता में एकता, आस्था में शक्ति और परंपराओं के सम्मान का संदेश देता है।