KNEWS DESK- हिंदू पंचांग में विजया एकादशी को अत्यंत प्रभावशाली और फलदायी माना गया है। यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना कर जीवन की कठिन परिस्थितियों पर विजय पाने की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत शत्रुओं पर जीत, मानसिक मजबूती और रुके हुए कार्यों में सफलता दिलाता है।
विजया एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
विजया एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि आत्मबल, संयम और संकल्प को मजबूत करने का पर्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से पुराने कष्ट दूर होते हैं और जीवन में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं।
यह व्रत व्यक्ति को जाने-अनजाने में हुए दोषों से मुक्ति दिलाता है और साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। विशेष रूप से संघर्ष के दौर से गुजर रहे लोगों के लिए इस एकादशी को अत्यंत शुभ माना गया है।
भगवान श्रीराम से जुड़ी विजया एकादशी की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार, लंका विजय से पहले भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर विजया एकादशी का व्रत किया था। मुनि वकदालभ्य के मार्गदर्शन में किए गए इस व्रत के प्रभाव से श्रीराम को रावण पर विजय प्राप्त हुई। इसी कारण इस एकादशी को विजय दिलाने वाली एकादशी कहा जाता है और कठिन समय में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
विजया एकादशी 2026: तिथि कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण एकादशी की तिथियां इस प्रकार हैं—
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे
- उदयातिथि के अनुसार व्रत: 13 फरवरी 2026, शुक्रवार
विजया एकादशी 2026 के शुभ पूजा मुहूर्त
इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पूजा एकादशी तिथि के भीतर ही करनी चाहिए। शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं—
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:18 से 06:10 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 09:08 से 10:54 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक
विजया एकादशी व्रत पारण का सही समय
विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
- पारण समय: सुबह 07:00 से 09:14 बजे तक
- हरि वासर समाप्ति: सुबह 08:20 बजे
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरि वासर के बाद ही पारण करना शुभ माना जाता है।
विजया एकादशी पर क्या करें और किन बातों से बचें
- संयम, श्रद्धा और शांति के साथ दिन व्यतीत करें।
- इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करें।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- क्रोध, नकारात्मक विचार और वाद-विवाद से दूर रहें।