KNEWS DESK- इस वर्ष वरुथिनी एकादशी का पावन व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी की शुरुआत 13 अप्रैल को प्रातः 01:16 बजे होगी और इसका समापन 14 अप्रैल को रात 01:08 बजे होगा। शास्त्रों में इस एकादशी का अत्यंत महत्व बताया गया है। यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है बल्कि व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, शांति और समृद्धि भी लाता है।
सेंधा नमक: व्रत का शुद्ध विकल्प
एकादशी के व्रत में सेंधा नमक का विशेष महत्व है। इसे सबसे शुद्ध नमक माना जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से प्राप्त होता है और इसके निर्माण में किसी प्रकार की रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग नहीं किया जाता। इसके विपरीत, साधारण नमक समुद्री जल से बनता है और उसकी शुद्धता को लेकर शंका बनी रहती है।
व्रत के दौरान अनाज का सेवन वर्जित होता है, इसलिए फलाहार के साथ सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है। यह न केवल परंपराओं के अनुरूप है बल्कि शरीर के लिए भी लाभकारी है।
व्रत में सेहत का ख्याल
उपवास के समय शरीर को हल्का और संतुलित आहार चाहिए होता है। सेंधा नमक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पाचन को सरल बनाता है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। व्रत के दौरान थकान या कमजोरी महसूस होने पर सेंधा नमक युक्त फलाहार जैसे कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा या सामा के चावल उपयोगी होते हैं। इसके नियमित सेवन से रक्तचाप संतुलित रहता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।
सात्विक भोजन और मानसिक शांति
वरुथिनी एकादशी केवल खान-पान का व्रत नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि का भी अवसर है। सात्विक भोजन, जैसे ताजे फल, दूध और सेंधा नमक, मन को शांत और विचारों को शुद्ध बनाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा की जाती है, जो हमें कठिनाइयों से बाहर निकालने की प्रेरणा देते हैं।
साथ ही, इस दिन सेवा, दान और मधुर व्यवहार का विशेष महत्व होता है। व्रत का सच्चा फल तभी मिलता है जब हम अपने आचरण को भी पवित्र बनाएं।
वरुथिनी एकादशी का व्रत केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का एक माध्यम है। सेंधा नमक जैसे शुद्ध तत्वों का उपयोग, सात्विक आहार और शुद्ध विचार हमें एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। इस पावन अवसर पर आत्मचिंतन और संयम का पालन करें और जीवन में नई ऊर्जा का अनुभव करें।