KNEWS DESK- हिन्दू धर्म में माघ मास को साधना, तप और संयम का विशेष समय माना गया है। वर्ष 2026 में माघ मास का शुभारंभ 3 जनवरी से हो चुका है और यह 15 फरवरी तक चलेगा। इस पावन अवधि में प्रयागराज के संगम तट पर हजारों श्रद्धालु कल्पवास का पालन करते हैं। लगभग 30 दिनों तक चलने वाला यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मनिरीक्षण का मार्ग है। कल्पवासी सादगीपूर्ण जीवन अपनाकर नियमित संगम स्नान, मंत्र जाप, दान और स्वाध्याय में समय बिताते हैं।
पाप क्षय और मोक्ष की साधना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास में संगम तट पर कल्पवास करने से संचित पापों का क्षय होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस अवधि में किया गया स्नान, जप और दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। प्रतिदिन प्रातःकाल संगम स्नान के बाद ईश्वर स्मरण और मंत्र जाप मन और आत्मा को शुद्ध करता है। यही कारण है कि कल्पवास को केवल व्रत नहीं, बल्कि मोक्ष की दिशा में अग्रसर करने वाली साधना माना गया है।
30 दिनों का अनुशासन और संयम
कल्पवास का मूल आधार अनुशासित जीवनशैली है। इन 30 दिनों में श्रद्धालु सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और भोग-विलास से दूर रहते हैं। रेत पर शयन, सीमित वस्त्र और न्यूनतम आवश्यकताओं में जीवन बिताना इस व्रत की पहचान है। यह अनुशासन व्यक्ति को इच्छाओं पर नियंत्रण सिखाता है और आधुनिक जीवन की भागदौड़ से दूर रखकर मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
मानसिक शांति और शारीरिक लाभ
कल्पवास केवल आध्यात्मिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके मानसिक और शारीरिक फायदे भी स्पष्ट दिखाई देते हैं। नियमित प्रातःकाल संगम स्नान से शरीर शुद्ध होता है और तनाव कम होता है। मोबाइल और आधुनिक व्याकुलताओं से दूरी मन को केंद्रित बनाती है। रेत पर सोने की परंपरा को आज की भाषा में अर्थिंग थैरेपी जैसा माना जाता है, जिससे शरीर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है और ऊर्जा संतुलन बनता है। इससे मन शांत और ध्यान अधिक गहरा होता है।
दान, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश
माघ मास में दान और सेवा का विशेष महत्व है. इस दौरान अन्न, वस्त्र, तिल, घी और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार माघ में किया गया दान अक्षय फल देता है। कल्पवास व्यक्ति को केवल व्यक्तिगत साधना ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी बोध कराता है। संगम तट पर बसे शिविरों में कल्पवासी एक-दूसरे की सहायता करते हैं, जिससे करुणा, सहयोग और सामूहिक समरसता का भाव विकसित होता है।
आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से समृद्ध बनाने वाला व्रत
कुल मिलाकर माघ मास का कल्पवास जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का अवसर देता है. यह व्रत व्यक्ति को आत्मिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक संवेदनशीलता प्रदान करता है। यही कारण है कि माघ मास को साधना, संयम और सेवा का महापर्व कहा गया है।