KNEWS DESK- पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 का दूसरा रोहिणी व्रत 25 फरवरी, बुधवार को रखा जा रहा है। यह व्रत हिंदू और जैन दोनों समुदायों में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इस वर्ष रोहिणी व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है, जिससे इसकी शुभता और बढ़ गई है।

रोहिणी व्रत का धार्मिक महत्व
रोहिणी व्रत का विशेष संबंध भगवान कृष्ण से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र कहा गया है। इसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। जब यह व्रत शुभ योग में पड़ता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
जैन धर्म में रोहिणी व्रत का महत्व
जैन समुदाय में भी यह व्रत अत्यंत श्रद्धा के साथ रखा जाता है। इस दिन जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु उपवास रखकर संयम, साधना और पूजा के माध्यम से आत्मशुद्धि का संकल्प लेते हैं।
घर पर ऐसे करें रोहिणी व्रत की पूजा
यदि आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर भी सरल विधि से पूजा कर सकते हैं—
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण करें।
- घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
- भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- पीले फूल, तुलसी दल, माखन-मिश्री अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं और रोहिणी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।
व्रत के दिन इन बातों का रखें ध्यान
- क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- घर में स्वच्छता और शांति बनाए रखें।
- जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ माना गया है।
- सात्विक भोजन करें और संयम का पालन करें।
रोहिणी व्रत के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोहिणी व्रत रखने से—
- घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
- मानसिक तनाव दूर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- भगवान कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
रोहिणी व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और सकारात्मकता का पर्व है। इस दिन शुभ योग का संयोग इसकी महिमा को और बढ़ा देता है। सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।