Ramadan 2026: रमजान का पाक महीना शुरू, जानें रोजा रखने के नियम…

KNEWS DESK- देशभर में 18 फरवरी को रमजान का चांद दिखाई देने के साथ ही पाक महीने की शुरुआत हो गई। आज पहला रोजा रखा जा रहा है। रमजान का महीना शुरू होते ही मस्जिदों में नमाज और तरावीह के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। बाजारों में खजूर, सेहरी और इफ्तार के सामान की रौनक बढ़ गई है।

Ramadan इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस दौरान मुसलमान रोजा रखकर इबादत करते हैं और आत्मसंयम का पालन करते हैं।

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, पवित्र ग्रंथ Quran इसी महीने अवतरित हुआ था। इसलिए रमजान को बरकत, माफी और रहमत का महीना कहा जाता है। रोजा इस्लाम के पांच मूल स्तंभों में से एक है। इसका उद्देश्य केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करना, धैर्य सीखना और जरूरतमंदों की तकलीफ को महसूस करना है।

रोजा रखने वाले व्यक्ति को रोजेदार कहा जाता है। वह दिनभर संयम रखकर अल्लाह की इबादत करता है और नेक कामों पर ध्यान देता है।

इस्लाम में हर स्वस्थ और बालिग मुसलमान के लिए रोजा रखना अनिवार्य माना गया है। हालांकि कुछ लोगों को छूट दी गई है, जैसे— गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, यात्रा कर रहे लोग, मासिक धर्म के दौरान महिलाएं। ऐसे लोग बाद में छूटे हुए रोजों की कज़ा अदा कर सकते हैं, जिसके लिए विशेष नियम निर्धारित हैं।

रोजा सुबह फज्र की नमाज से पहले सेहरी के साथ शुरू होता है और सूर्यास्त के समय इफ्तार के साथ समाप्त होता है। सेहरी में हल्का और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी जाती है ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे। इफ्तार पर पारंपरिक रूप से खजूर और पानी से रोजा खोला जाता है।

सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजेदार खाना-पीना, धूम्रपान और अन्य सांसारिक इच्छाओं से परहेज करते हैं। साथ ही बुरी बातों, झूठ, गुस्से और अपमानजनक व्यवहार से बचना भी जरूरी माना जाता है।

इस्लामी नियमों के अनुसार जानबूझकर खाना-पीना, धूम्रपान या वैवाहिक संबंध बनाने से रोजा टूट जाता है। इसके अलावा झूठ बोलना, गाली देना या किसी का दिल दुखाना रोजे की रूह के खिलाफ माना जाता है। कहा जाता है कि रोजा सिर्फ पेट का नहीं, बल्कि नजर और जुबान का भी होता है।

रमजान का यह महीना आत्मचिंतन, दान-पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। रोजेदार इस दौरान खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते हैं और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।

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