Pradosh Vrat: मार्च की शुरुआत में रवि प्रदोष व्रत का पावन संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

KNEWS DESK- मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पड़ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। चूंकि आज रविवार है, इसलिए यह रवि प्रदोष व्रत कहलाता है। यह व्रत देवों के देव भगवान शिव को समर्पित है और इस दिन प्रदोष काल में शिव-पार्वती की विशेष पूजा का विधान है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक प्रदोष व्रत रखते हैं, उन्हें भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत के प्रभाव से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

प्रदोष व्रत प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जिस वार को यह तिथि पड़ती है, उसी के अनुसार व्रत का नाम रखा जाता है—जैसे सोमवार को सोम प्रदोष, शनिवार को शनि प्रदोष और रविवार को रवि प्रदोष।

रवि प्रदोष व्रत को विशेष रूप से स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

  • पूजा का शुभ समय: शाम 6 बजकर 21 मिनट से 7 बजकर 08 मिनट तक
  • इस अवधि में प्रदोष काल रहेगा।
  • इस समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  1. व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
  3. दिनभर संयम रखें और सात्विक आहार का पालन करें।
  4. प्रदोष काल में पूजा स्थल को शुद्ध कर दीप प्रज्वलित करें।
  5. शिवलिंग का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  6. बिल्व पत्र, चंदन, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग और इलायची अर्पित करें।
  7. रवि प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
  8. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  9. अंत में आरती कर पूजा का समापन करें।
  10. रात्रि में जागरण करना भी शुभ माना जाता है।

प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ

  • जीवन के कष्टों से मुक्ति
  • मनोकामनाओं की पूर्ति
  • दांपत्य जीवन में सुख-शांति
  • आरोग्य और आयु में वृद्धि
  • आर्थिक उन्नति और समृद्धि

प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का अत्यंत शुभ अवसर है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

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