KNEWS DESK- पोंगल दक्षिण भारत का प्रमुख सूर्य पूजा और कृषि से जुड़ा पर्व है, जिसे खास तौर पर तमिलनाडु में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में पोंगल 14 से 17 जनवरी तक मनाया जाएगा। यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य देव और अन्नदाता किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।

पोंगल पर्व की सबसे खास परंपरा: दूध-चावल का उफान
पोंगल की सबसे अनोखी और महत्वपूर्ण परंपरा है दूध और चावल का उफान आना। जैसे ही दूध उबलकर चावल के साथ बाहर आता है, इसे शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह उफान समृद्धि, खुशहाली और सूर्य देव के आशीर्वाद का प्रतीक होता है। यह केवल भोजन पकाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आस्था और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा पावन क्षण है।
सूर्य देव से जुड़ी आध्यात्मिक मान्यता
प्राचीन वैदिक परंपराओं में पोंगल के उफान को सूर्य देव की कृपा का प्रतीक माना गया है। उफान के समय “पोंगलो पोंगल” का उच्चारण किया जाता है और सूर्य देव से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। माना जाता है कि जैसे दूध-चावल उफनता है, वैसे ही घर में धन-धान्य और खुशहाली बढ़ती है।
धार्मिक और सामाजिक उत्सव का संगम
पोंगल केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सामाजिक पर्व भी है। इस दौरान पूरा परिवार एक साथ पोंगल पकाने की प्रक्रिया में शामिल होता है। बच्चे, बुजुर्ग और युवा मिलकर इस परंपरा को निभाते हैं, जिससे परिवारिक एकता, सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है पोंगल
दूध और चावल से बना पोंगल स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। दूध प्रोटीन और ऊर्जा का स्रोत है, जबकि चावल कार्बोहाइड्रेट और पोषक तत्व प्रदान करता है। यह सात्विक, हल्का और सुपाच्य भोजन है, जो सर्दियों के मौसम में शरीर को ऊर्जा और मानसिक संतुलन देता है।
पोंगल पकाते समय दूध-चावल का उफान इस पर्व का सबसे शुभ और उत्साहपूर्ण पल माना जाता है। मंत्रोच्चार, सात्विक सामग्री और पूरे परिवार की सहभागिता इसे एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव में बदल देती है।
क्यों खास है पोंगल?
पोंगल केवल एक व्यंजन या पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य, अन्न और परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है। यही वजह है कि पोंगल को धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वास्थ्य हर दृष्टि से एक पूर्ण और सार्थक पर्व माना जाता है।