Panchak 2026: फरवरी 2026 में कब से शुरू हो रहे हैं पंचक? जानिए सही तिथि और इस दिन भूलकर भी नहीं किए जाने वाले काम

KNEWS DESK- सनातन परंपरा में पंचक का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना गया है। लोकभाषा में इसे “भदवा” भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार पंचक के पांच दिन शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माने जाते। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए कार्यों में विघ्न आ सकते हैं और अपेक्षित सफलता नहीं मिलती।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करता है, तब पंचक लगता है। सरल शब्दों में कहें तो जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में प्रवेश करता है, तब यह काल प्रारंभ होता है। यह अवधि कुल पांच दिनों की होती है, इसलिए इसे पंचक कहा जाता है।

फरवरी 2026 में पंचक कब से शुरू हो रहे हैं?

पंचांग के अनुसार फरवरी 2026 में पंचक की शुरुआत 16 फरवरी से हो रही है। यह संयोग महाशिवरात्रि के अगले दिन बन रहा है।

  • प्रारंभ: 16 फरवरी 2026, सोमवार, रात 8 बजकर 52 मिनट
  • समापन: 21 फरवरी 2026, रात 7 बजकर 58 मिनट

इन पांच दिनों तक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

पंचक के दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए?

लकड़ी या घास-फूस इकट्ठा करना

पंचक के समय लकड़ी, ईंधन या घास-फूस एकत्र करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे अग्नि संबंधी संकट उत्पन्न हो सकता है।

घर की छत डलवाना

यदि घर का निर्माण कार्य चल रहा हो तो पंचक में छत डालने से बचना चाहिए। ऐसा करने से घर में कलह और आर्थिक हानि की आशंका बताई गई है।

चारपाई या नया बेड बनवाना

पंचक काल में नया पलंग या चारपाई बनवाना या खरीदना शुभ नहीं माना जाता। यह सुख-शांति में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

दक्षिण दिशा की यात्रा

दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा कहा गया है। पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से कष्ट मिलने की मान्यता है, इसलिए इससे बचना उचित माना जाता है।

अंतिम संस्कार में विशेष सावधानी

पंचक में मृत्यु को अत्यंत संवेदनशील माना गया है। मान्यता है कि यदि इस अवधि में किसी की मृत्यु होती है तो परिवार पर और संकट आ सकते हैं। इसलिए परंपरा के अनुसार शव के साथ पांच प्रतीकात्मक पुतले बनाकर दाह संस्कार करने की प्रथा भी बताई गई है, ताकि संभावित दोष शांत हो सके।

पंचक में क्या करें?

हालांकि पंचक को अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान जप, तप, दान, भगवान का स्मरण और धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ फलदायी माना गया है। विशेष रूप से शिव आराधना और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना कल्याणकारी बताया गया है।

पंचक एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अवधि है, जिसके दौरान कुछ कार्यों से परहेज करने की परंपरा है। हालांकि यह मान्यताएं धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं, फिर भी सनातन धर्म का पालन करने वाले लोग इन नियमों का ध्यान रखते हैं। उचित जानकारी और सावधानी के साथ इस अवधि को सहज रूप से व्यतीत किया जा सकता है।

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