KNEWS DESK- आज, 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को वरुथिनी एकादशी का पवित्र व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना गया है, और यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है।
एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं रहती। यह व्रत सौभाग्य में वृद्धि करता है और व्यक्ति को सफलता व यश दिलाने में सहायक होता है। जो लोग पूर्ण व्रत नहीं कर पाते, वे भी कुछ नियमों का पालन कर इसके पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं।
एकादशी के दिन अपनाएं ये 5 जरूरी नियम
सात्विक भोजन करें
एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए इस दिन केवल सात्विक भोजन करें। लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशीली वस्तुओं का सेवन पूरी तरह से वर्जित है।
बाल और नाखून न काटें
इस दिन बाल धोना, बाल काटना या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। साथ ही कपड़े धोने जैसे कार्यों से भी बचना चाहिए।
नकारात्मकता से दूर रहें
एकादशी सकारात्मक ऊर्जा का दिन है। इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाएं। मन को शांत और पवित्र रखें।
भगवान विष्णु का स्मरण करें
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
दान-पुण्य करें
जरूरतमंदों की सहायता करना इस दिन विशेष फल देता है। गरीबों को भोजन कराना या अपनी सामर्थ्य अनुसार दान देना पुण्यकारी माना गया है।
संतों की दृष्टि में एकादशी का महत्व
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने भी अपने प्रवचनों में एकादशी व्रत के महत्व को कई बार बताया है। उनके अनुसार, यह व्रत जीवन में सुख-शांति, धन और सौभाग्य लाता है। नियमित रूप से एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
वरुथिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। यदि आप पूरा व्रत नहीं कर पा रहे हैं, तो भी इन सरल नियमों का पालन करके आप इसके पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भगवान विष्णु का स्मरण करें और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत करें।