KNEWS DESK- हिंदू धर्म में सकट चौथ का व्रत अत्यंत पुण्यदायी और विशेष माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और जीवन से संकटों के निवारण के लिए करती हैं। मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत रखने से संकटहर्ता भगवान गणेश भक्तों के जीवन से हर प्रकार की बाधा और कष्ट दूर कर देते हैं।
इस दिन शाम के समय भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है और सकट चौथ की कथा का पाठ किया जाता है। माना जाता है कि कथा के बिना यह व्रत अधूरा रहता है।
एक समय की बात है, एक बुजुर्ग महिला थी जो प्रतिदिन मिट्टी से भगवान गणेश की मूर्ति बनाकर पूरे श्रद्धा भाव से उनकी पूजा किया करती थी। लेकिन समस्या यह थी कि मिट्टी के गणेश रोज गल जाते थे, जिससे उसे हर दिन नई मूर्ति बनानी पड़ती थी।
उसी महिला के घर के पास एक सेठ जी का मकान बन रहा था, जहां कई मिस्त्री काम कर रहे थे। बूढ़ी माई ने मिस्त्रियों से विनम्रता से कहा, “मेरे लिए पत्थर के गणेश जी बना दो, ताकि रोज-रोज मूर्ति बनाने की परेशानी खत्म हो जाए।”
मिस्त्रियों ने उपेक्षा करते हुए जवाब दिया कि जितने समय और पैसे में वे पत्थर के गणेश बनाएंगे, उतने में तो दीवार भी नहीं खड़ी कर पाएंगे। यह सुनकर बूढ़ी माई को दुख और क्रोध आया। उन्होंने कहा, “भगवान करे तुम्हारी दीवार कभी सीधी न बने।”
उनके ऐसा कहते ही चमत्कार हुआ। मिस्त्री चाहे जितनी बार दीवार बनाते, वह हर बार टेढ़ी हो जाती। दिनभर मेहनत के बाद भी दीवार खड़ी नहीं हो पाई।
शाम को जब सेठ जी आए और उन्होंने सारा हाल जाना, तो वे तुरंत बूढ़ी माई के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर बोले, “मां, हमसे बड़ी भूल हो गई। आप कहें तो हम सोने के गणेश भी बनवा देंगे, बस हमारी दीवार सीधी कर दीजिए।”
सेठ जी की विनम्रता और श्रद्धा देखकर बूढ़ी माई प्रसन्न हो गईं। सेठ जी ने उनके लिए सोने के गणेश जी बनवाए। इसके बाद भगवान गणेश की कृपा से दीवार अपने आप सीधी बन गई।
अंत में सभी ने प्रार्थना की— “हे गणपति महाराज, जैसे आपने सेठ की दीवार सीधी की, वैसे ही हमारे जीवन के सभी बिगड़े काम भी संवार दीजिए।”
सकट चौथ की पूजन विधि-
सकट चौथ के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखें।
शाम के समय पूजा स्थान को साफ कर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
दीपक जलाकर गणेश जी को रोली, अक्षत, पुष्प, दूर्वा और तिल-गुड़ का भोग अर्पित करें।
इसके बाद सकट चौथ की कथा पढ़ें या सुनें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर जल अर्पित करें और फिर व्रत का पारण करें।