KNEWS DESK- सनातन धर्म में मौनी अमावस्या को व्रत, मौन और आत्मशुद्धि का अत्यंत पावन पर्व माना गया है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से प्रारंभ होकर 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। इस दिन का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं होता, बल्कि मन, वाणी और कर्म की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत मानसिक शांति, पाप क्षय और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है।
मौनी अमावस्या व्रत का धार्मिक महत्व
मौनी अमावस्या का व्रत मौन, संयम और आत्मचिंतन से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मौन रहकर किया गया व्रत इंद्रियों को शांत करता है और मन को स्थिर बनाता है। अमावस्या तिथि पितरों को प्रिय मानी जाती है, इसलिए इस दिन तर्पण और साधना करने से पितृ शांति का विशेष फल प्राप्त होता है। यह व्रत बाहरी दिखावे से हटकर भीतर की शुद्धि की ओर प्रेरित करता है।
मौनी अमावस्या पर व्रत रखने वाले क्या करें
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र जल या गंगा स्नान करें।
- स्नान के बाद व्रत और मौन का संकल्प लें।
- दिनभर यथासंभव मौन का पालन करें।
- सूर्य देव का स्मरण, जप और ध्यान करें।
- फल, दूध या जल जैसे सात्विक आहार का सेवन करें।
- घर में दीपक और धूप जलाकर शांत वातावरण बनाए रखें।
- पितरों के लिए तर्पण करें और जरूरतमंदों को दान दें।
मौनी अमावस्या व्रत में किन बातों से बचें
- अनावश्यक बातचीत, विवाद और क्रोध से दूरी बनाए रखें।
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- झूठ बोलने और कटु वचन कहने से बचें।
- आलस्य या दिनभर सोने से बचें।
- व्रत को दिखावे की बजाय श्रद्धा और नियम से निभाएं।
मौनी अमावस्या व्रत से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ
मौनी अमावस्या का व्रत साधक को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। मौन और उपवास से मन के विकार शांत होते हैं और आत्मा निर्मल होती है। इस व्रत से धैर्य, आत्मबल और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है। पितृ तर्पण और दान से पारिवारिक शांति और संतुलन बना रहता है। धार्मिक दृष्टि से यह व्रत जीवन में संयम, शांति और सकारात्मकता को अपनाने की प्रेरणा देता है।