KNEWS DESK- हिंदू धर्म में माघ महीने की पूर्णिमा को अत्यंत पावन माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। साल 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी।

पौराणिक विश्वास है कि माघ पूर्णिमा के दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर प्रयागराज के संगम तट पर स्नान करते हैं। यही कारण है कि इस दिन का पुण्य अत्यंत फलदायी माना गया है।
अश्वमेध यज्ञ के समान फल क्यों मिलता है?
मत्स्य पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि माघ मास में सभी तीर्थ गंगाजल में वास करते हैं। विशेष रूप से माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।
मान्यता है कि जो श्रद्धालु नियम-निष्ठा से इस दिन स्नान, जप और दान करता है, उसे सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी दिन कल्पवास की परंपरा का समापन भी होता है।
माघ पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा की तिथि इस प्रकार है—
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 31 जनवरी 2026, रात से
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 1 फरवरी 2026, शाम तक
- उदयातिथि के अनुसार व्रत और स्नान: 1 फरवरी 2026 (रविवार)
- स्नान का सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त, सुबह 05:15 से 06:10 बजे तक
माघ पूर्णिमा की सही पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त स्नान
सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
सूर्य को अर्घ्य
स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
विष्णु पूजन
भगवान श्री हरि विष्णु या सत्यनारायण की पूजा करें। पीले फूल, पंचामृत, फल और तुलसी दल अर्पित करें।
मंत्र जाप
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें—
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
आरती और दान
अंत में आरती करें और जरूरतमंदों को तिल, गुड़, घी, कंबल और अनाज का दान करें।
माघ पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य दें।
- पितरों के नाम पर तर्पण करें।
- व्रत और जप में संयम रखें।
क्या न करें
- तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन) से परहेज करें।
- क्रोध, झूठ और किसी का अपमान न करें।
दान का विशेष महत्व
माघ पूर्णिमा पर किया गया दान अनंत गुना फल देता है। इस दिन काले तिल का दान विशेष रूप से शुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इससे शनि और राहु के दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।