माघ मास 2026: माघ मास में पुण्य पाने के लिए जरूर करें ये दान, जानिए क्यों दीपदान को माना गया है सबसे विशेष

KNEWS DESK- सनातन धर्म में माघ मास को आत्मशुद्धि, पुण्य संचय और साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण काल माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह मास मन, शरीर और आत्मा तीनों की शुद्धि के लिए विशेष फल प्रदान करता है। वर्ष 2026 में माघ मास का आरंभ 4 जनवरी से होकर 1 फरवरी तक रहेगा। इस अवधि में किया गया स्नान, दान, जप, तप और दीपदान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य देता है। यही कारण है कि माघ मास को सत्कर्म और आत्मिक उन्नति का विशेष महीना कहा गया है।

माघ मास में संयम और सात्विक जीवन का महत्व

शास्त्रों में बताया गया है कि माघ मास में संयमित जीवन और सात्विक आहार अपनाने से पापों का क्षय होता है। इस दौरान क्रोध, अहंकार और तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहकर सत्य, सेवा और करुणा का मार्ग अपनाना चाहिए। संयम और साधना से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

माघ मास में दान क्यों है सबसे पुण्यकारी?

माघ मास में दान को विशेष फलदायी माना गया है। पद्मपुराण और स्कंदपुराण के अनुसार, इस मास में किया गया दान पापों का नाश करता है और शुभ फल प्रदान करता है। अन्नदान, वस्त्रदान, तिलदान और घृतदान को श्रेष्ठ दानों में गिना गया है। शीत ऋतु के कारण जरूरतमंदों को कंबल, गर्म वस्त्र और अन्न का दान करना धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य भी माना गया है. मान्यता है कि इस दान से पूर्वजों की आत्मा को भी तृप्ति मिलती है और पितृदोष में कमी आती है।

तिल दान और अन्न दान का विशेष रहस्य

माघ मास में तिल का विशेष महत्व है। तिल को पवित्रता, तप और संरक्षण का प्रतीक माना गया है। तिल का दान, तिल से हवन और तिल का सेवन रोग, शोक और दरिद्रता के नाश में सहायक माना जाता है। वहीं अन्न दान को महादान कहा गया है। माघ मास में अन्न दान करने से घर में अन्न की कमी नहीं होती और जीवन में स्थिरता व समृद्धि आती है। श्रद्धा भाव से दिया गया अन्न अक्षय पुण्य का कारण बनता है।

दीपदान का आध्यात्मिक अर्थ

माघ मास में दीपदान को अत्यंत फलदायी माना गया है। विशेष रूप से नदी, तीर्थ या मंदिर में संध्या समय दीपदान करने से जीवन का अंधकार दूर होता है। दीप को ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना गया है। माघ मास में किया गया दीपदान आत्मा के अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त करता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है। घी या तिल के तेल से जलाया गया दीप मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

माघ मास में क्या करें और क्या न करें

माघ मास में ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करना श्रेष्ठ माना गया है। यदि नदी या तीर्थ में स्नान संभव न हो, तो स्नान जल में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना लाभकारी होता है। इस मास में सात्विक भोजन, सत्य भाषण और सेवा भाव अपनाना चाहिए। तामसिक आहार, कटु वचन, आलस्य और अहंकार से बचना चाहिए। माघ मास का सही पालन जीवन को धार्मिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *