KNEWS DESK- सिख धर्म में लोहड़ी को अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन पर्व माना जाता है। आज यह त्योहार देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में रहने वाले भारतीय पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं। खासकर पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी की धूम देखते ही बनती है। जिन घरों में हाल ही में नया विवाह हुआ हो, वहां यह पर्व और भी खास अंदाज में मनाया जाता है।

लोहड़ी मुख्य रूप से कृषि और फसल से जुड़ा पर्व है। इस दिन किसान अपनी रबी की फसल, खासकर गेहूं और सरसों की अच्छी पैदावार की खुशी में सूर्य देव और अग्नि देव की विशेष पूजा करते हैं। शाम होते ही ढोल-नगाड़ों, नाच-गाने और लोकगीतों के बीच लोहड़ी की अग्नि जलाई जाती है और नई फसल को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।
लोहड़ी पूजा और अग्नि प्रज्वलन का शुभ मुहूर्त
- तिथि: 13 जनवरी 2026
- शुभ मुहूर्त: शाम 05:43 बजे से 07:15 बजे तक
इस वर्ष लोहड़ी पर सुकर्मा और चित्रा योग का संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इन शुभ योगों में लोहड़ी मनाने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
लोहड़ी पूजा की सामग्री
- लकड़ी
- उपले
- दूध
- घी
- तिल
- गुड़
- रेवड़ी
- मूंगफली
- मक्का (पॉपकॉर्न)
- गेहूं की बालियां (विशेष रूप से किसानों के लिए)
लोहड़ी की पूजा विधि
- लोहड़ी की शाम घर के बाहर या किसी खुली जगह की अच्छी तरह सफाई करें।
- वहां लकड़ियां और उपले इकट्ठा कर ढेर बनाएं।
- शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करें।
- अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हुए दूध और जल अर्पित करें।
- अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली, मक्का और किसान गेहूं की बालियां अर्पित करें।
- अग्नि की 7 या 11 परिक्रमा करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
- पूजा के बाद सभी को रेवड़ी और मूंगफली का प्रसाद वितरित करें।
लोहड़ी न सिर्फ एक त्योहार है, बल्कि कृतज्ञता, परंपरा और सामूहिक खुशी का उत्सव है, जो नई शुरुआत और बेहतर भविष्य का संदेश देता है।