KNEWS DESK- हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। जब सूर्य देव एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, उस खगोलीय परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। फरवरी महीने में सूर्य देव मकर राशि को छोड़कर कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे कुंभ संक्रांति कहा जाता है।
अक्सर इस पर्व की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम बना रहता है। अगर आपके मन में भी कुंभ संक्रांति की तारीख को लेकर उलझन है, तो यहां आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी।
Kumbh Sankranti 2026 कब है? (तिथि और समय)
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में कुंभ संक्रांति शुक्रवार, 13 फरवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन सूर्य देव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे।
- सूर्य गोचर का समय: सुबह 04 बजकर 14 मिनट
- दिन: शुक्रवार
शास्त्रों में बताया गया है कि संक्रांति के पुण्य काल में किया गया स्नान, दान और जप अक्षय फल प्रदान करता है।
Kumbh Sankranti 2026 का शुभ पुण्य काल
कुंभ संक्रांति के दिन सूर्य के गोचर के समय से पुण्य काल प्रारंभ हो जाता है। इस अवधि में-
- पवित्र नदियों में स्नान
- तिल, अनाज और वस्त्र का दान
- सूर्य देव की उपासना
विशेष फलदायी मानी जाती है।
कुंभ संक्रांति की पूजा विधि
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्नान के जल में गंगाजल मिलाना शुभ होता है।
- तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, कुमकुम और अक्षत डालें।
- सूर्य देव को अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अनाज, तिल या गर्म वस्त्र का दान करें।
- इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना विशेष पुण्यदायी माना गया है, जिससे आरोग्य और शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद मिलता है।
कुंभ संक्रांति का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में कुंभ संक्रांति को अत्यंत पावन पर्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
- इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
- सूर्य देव की पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- स्वास्थ्य, यश और समृद्धि में वृद्धि होती है।
देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर स्नान पर्व, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। विशेष रूप से गंगा, यमुना, गोदावरी और नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान को अत्यंत शुभ माना गया है।