KNEWS DESK- पंचांग के अनुसार साल 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च 2026 से हो चुकी है और यह 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा। लगभग एक महीने की इस अवधि को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। इस समय में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को करने से परहेज किया जाता है।
हालांकि यह समय मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए इसे बेहद शुभ बताया गया है।
क्या होता है खरमास
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों—धनु या मीन—में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है। इस दौरान ग्रहों की स्थिति ऐसी मानी जाती है कि शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल मुहूर्त नहीं बन पाता।
इसी कारण परंपरागत रूप से इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को टाल दिया जाता है। वहीं धार्मिक साधना, मंत्र जाप और सेवा-दान को विशेष फलदायी माना गया है।
खरमास में क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में सूर्य की स्थिति और ग्रहों की चाल ऐसी होती है कि शुभ कार्यों के लिए आवश्यक ग्रहों का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पाता।
शास्त्रों में कहा गया है कि यदि इस समय कोई बड़ा या नया कार्य शुरू किया जाए तो उससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। इसलिए परंपरा के अनुसार लोग इन कार्यों को खरमास समाप्त होने के बाद करना ही उचित मानते हैं।
खरमास में किन कार्यों से करना चाहिए परहेज
खरमास के दौरान कुछ मांगलिक और बड़े कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है, जैसे:
- विवाह और सगाई
- गृह प्रवेश
- नए घर का निर्माण शुरू करना
- नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना
- मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार
- बड़े शुभ आयोजन और समारोह
खरमास में क्या करना माना जाता है शुभ
जहां एक ओर मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, वहीं इस समय कुछ धार्मिक कार्यों को करना बेहद पुण्यदायी माना गया है:
- भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा
- मंत्र जाप और ध्यान
- गरीबों को दान करना
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ
- तीर्थ या मंदिर दर्शन
आध्यात्मिक साधना का विशेष समय
धार्मिक दृष्टि से खरमास को आत्मचिंतन और भक्ति का समय माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। इसलिए कई लोग इस पूरे महीने को आध्यात्मिक साधना और सेवा के लिए समर्पित करते हैं।