KNEWS DESK- भगवान शिव के भक्तों के लिए कालाष्टमी का व्रत विशेष महत्व रखता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस समय वैशाख माह चल रहा है और 10 अप्रैल 2026 को कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पड़ रही है। इसलिए आज मासिक कालाष्टमी का व्रत रखना अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
इस दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि उनकी कृपा से भय, रोग, नकारात्मक ऊर्जा और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। साथ ही कुंडली में राहु, केतु और शनि ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
काल भैरव को समय के देवता और दंडाधिकारी माना जाता है। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और जीवन के सभी संकटों को दूर करते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
कालाष्टमी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:31 से 05:16
- अमृत काल – सुबह 06:08 से 07:54
- अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:57 से दोपहर 12:48
- सायाह्न संध्या – शाम 06:44 से 07:52
- निशिता मुहूर्त – रात 11:59 से 12:45
इन शुभ समयों में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
कालाष्टमी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और काले या नीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर में भगवान शिव या काल भैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लेकर दीपक जलाएं।
- भगवान को गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, फल, फूल, सरसों का तेल, काले तिल, भस्म और उड़द की दाल अर्पित करें।
- मंत्र जाप करने के बाद व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें।
व्रत पारण से पहले करें ये उपाय
कालाष्टमी के दिन व्रत का पारण करने से पहले काले कुत्ते को रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इससे काल भैरव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
कालाष्टमी व्रत कब खोलें?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद नवमी तिथि में खोला जाता है। 10 अप्रैल 2026 को अष्टमी तिथि रात 11 बजकर 15 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में व्रत का पारण 11 अप्रैल 2026 को सूर्योदय के बाद करना शुभ रहेगा। बताया जा रहा है कि 11 अप्रैल को सूर्योदय सुबह लगभग 6 बजे होगा, इसलिए इसी समय के बाद व्रत खोलना उत्तम माना जाएगा।
कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत, पूजा और कथा का पाठ करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।