KNEWS DESK- 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। भारतीय समयानुसार यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इसी कारण सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रभावी हो चुका है और यह ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा।

इस बार चंद्र ग्रहण होली के उत्सव के बीच पड़ रहा है, ऐसे में लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
क्या होता है सूतक काल?
जब चंद्र ग्रहण लगने वाला होता है, तो उससे 9 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है।
- कई मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
- पूजा-पाठ पर विशेष नियम लागू होते हैं।
- धार्मिक कार्यों को ग्रहण समाप्ति के बाद करना उचित माना जाता है।
सूतक काल का उद्देश्य मन और वातावरण की शुद्धता बनाए रखना माना जाता है।
होली के उत्साह में रखें इन बातों का ध्यान
चंद्र ग्रहण के कारण इस बार होली मनाने में भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल और ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए।
रंग खेलने से बचें
ग्रहण और सूतक काल के दौरान रंग खेलना या उत्सव मनाना शुभ नहीं माना जाता। होलिका दहन के बाद रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी, इसलिए उससे पहले रंग खेलने से परहेज करें।
पूजा-पाठ से संबंधित नियम
सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद किए जा सकते हैं। घर के मंदिर को पर्दे से ढक दें और मूर्तियों को स्पर्श न करें।
भोजन को लेकर सावधानी
ग्रहण के दौरान भोजन न करने की सलाह दी जाती है। यदि पहले से बना हुआ भोजन घर में है, तो उसमें तुलसी के पत्ते डाल देना शुभ माना जाता है।
गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान
ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। नुकीली या धारदार वस्तुओं का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।
नकारात्मक विचारों से रहें दूर
ग्रहण के दौरान वाद-विवाद, क्रोध या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। सकारात्मक सोच बनाए रखना लाभकारी माना जाता है।
ग्रहण समाप्ति के बाद क्या करें?
चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद कुछ धार्मिक उपाय करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
स्नान करें
ग्रहण समाप्त होते ही स्नान करें। संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
घर की शुद्धि करें
घर में गंगाजल का छिड़काव करें, जिससे वातावरण शुद्ध माना जाता है।
पूजा और मंत्र जाप
साफ वस्त्र धारण कर भगवान की पूजा करें। चंद्रमा से संबंधित मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना गया है।
दान-पुण्य का महत्व
ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
गर्भवती महिलाएं भी करें स्नान
ग्रहण समाप्ति के बाद गर्भवती महिलाएं भी स्नान कर भगवान का स्मरण करें।
धार्मिक मान्यताओं का करें सम्मान
चंद्र ग्रहण और सूतक काल को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। आस्था रखने वाले लोगों के लिए यह समय विशेष सावधानी और संयम का माना जाता है। ऐसे में जरूरी है कि उत्सव के बीच भी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए नियमों का पालन किया जाए, ताकि जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहे।