KNEWS DESK- 03 मार्च यानी आज को फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगी। खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत में भी आंशिक रूप से दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और बढ़ गया है।
खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की गहरी छाया (अंब्रा) में प्रवेश कर जाता है। इस दौरान सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से अपवर्तित होकर चंद्रमा तक पहुंचता है, जिससे वह लालिमा लिए दिखाई देता है। इसी कारण इसे “ब्लड मून” कहा जाता है।
भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर होगी।
शाम 04:58 बजे से 05:32 बजे तक पूर्ण चंद्र ग्रहण रहेगा।
भारत में यह शाम लगभग 06:20 बजे से दिखाई देना शुरू होगा।
शाम 06:46 बजे ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
इस प्रकार देश के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण लगभग 20 से 25 मिनट तक देखा जा सकेगा। कुछ स्थानों पर समय में थोड़ा अंतर संभव है।
आसमान साफ रहने की स्थिति में पूर्वोत्तर भारत में ब्लड मून का दृश्य अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है। वहीं पश्चिमी और दक्षिणी भारत में ग्रहण का केवल अंतिम चरण ही नजर आएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस ग्रहण का सूतक काल सुबह 06 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होगा और ग्रहण समाप्ति तक मान्य रहेगा। सूतक काल में मंदिरों के पट बंद रखने और पूजा-पाठ से परहेज करने की परंपरा है।
फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाला यह वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण है। धार्मिक दृष्टि से पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है, वहीं वैज्ञानिक रूप से ब्लड मून का दृश्य खगोलीय घटनाओं में अत्यंत आकर्षक माना जाता है।यदि आप इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देखना चाहते हैं, तो सूर्यास्त के बाद खुले आसमान वाली जगह पर खड़े होकर पूर्व दिशा की ओर नजर रखें। साफ मौसम में यह अद्भुत नजारा कुछ ही मिनटों के लिए सही, लेकिन यादगार जरूर रहेगा।