KNEWS DESK- चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो चुका है। यह नौ दिनों तक चलने वाला आध्यात्मिक उत्सव शक्ति की आराधना का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है और उनकी उपासना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
मां शैलपुत्री की पूजा क्यों है खास?
नवरात्रि का पहला दिन नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन चंद्रमा से संबंधित होता है, जिससे मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है।
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं?
शुद्ध देसी घी का भोग
मां शैलपुत्री को घी अत्यंत प्रिय है। उन्हें घी अर्पित करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही घी का दान करना भी बहुत पुण्यदायी माना गया है।
सफेद मिठाइयों का भोग
मां को सफेद रंग की मिठाइयां जैसे बर्फी, पेड़ा और खीर चढ़ाना शुभ होता है। सफेद रंग पवित्रता और शांति का प्रतीक है, जो मां को प्रसन्न करता है।
दूध और दुग्ध उत्पाद
दूध, दही और उनसे बने पकवान अर्पित करने से घर में शांति और सौभाग्य बढ़ता है। यह भोग मां को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
शक्कर या मिश्री
मिश्री का भोग लगाने से जीवन में मिठास बनी रहती है और रिश्तों में प्रेम व सामंजस्य बढ़ता है।
भोग लगाने का सही तरीका
- पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
- पूजा स्थल को साफ और पवित्र रखें
- मां को भोग अर्पित करते समय सच्चे मन से प्रार्थना करें
- भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार में वितरित करें
पूजा से मिलने वाले लाभ
मां शैलपुत्री की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से यश, कीर्ति और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
चैत्र नवरात्रि का यह शुभ अवसर भक्ति, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का पर्व है। मां शैलपुत्री की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे—इसी कामना के साथ इस पावन उत्सव की शुरुआत करें।