KNEWS DESK- ब्रज की होली केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और उल्लास से भरा 40 दिनों का रंगोत्सव है। 23 जनवरी 2026 से इसकी शुरुआत हो चुकी है, जो मुख्य होली पर्व तक और उसके बाद भी पूरे ब्रज क्षेत्र में उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह उत्सव उत्तर प्रदेश के ब्रज मंडल में आयोजित होता है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु एवं पर्यटक इसमें शामिल होने आते हैं।

ब्रज की होली का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा है, इसलिए यहां का हर आयोजन आध्यात्मिक भाव से ओत-प्रोत होता है।
25 फरवरी: बरसाना में लठमार होली का रंग
आज 25 फरवरी 2026 को बरसाना में प्रसिद्ध लठमार होली का आयोजन किया जा रहा है। यह अनोखी परंपरा पूरी दुनिया में मशहूर है। जहां पूरे देश में 4 मार्च 2026 को होली मनाई जाएगी, वहीं ब्रज में यह उत्सव कई सप्ताह पहले शुरू होकर मुख्य पर्व के बाद भी जारी रहता है।
किन शहरों में मनाई जाती है ब्रज की होली?
ब्रज क्षेत्र के प्रमुख शहरों में होली का विशेष उत्साह देखने को मिलता है—
- मथुरा
- वृंदावन
- बरसाना
- नंदगांव
- गोकुल
- महावन
- बलदेव
इन सभी स्थानों पर अलग-अलग परंपराओं के साथ होली खेली जाती है।
ब्रज होली की प्रमुख परंपराएं
फूलों की होली
वृंदावन के मंदिरों में भक्तों पर फूल बरसाकर होली खेली जाती है। यह दृश्य अत्यंत मनमोहक और आध्यात्मिक होता है।
लठमार होली
बरसाना और नंदगांव की लठमार होली सबसे प्रसिद्ध है। इसमें महिलाएं हंसी-ठिठोली में पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।
छड़ी मार होली और हुरंगा
गोकुल और महावन में छड़ी मार होली और पारंपरिक हुरंगा आकर्षण का केंद्र होते हैं।
ब्रज होली 2026 का प्रमुख कार्यक्रम
- 24 फरवरी – बरसाना में लड्डू होली
- 25 फरवरी – बरसाना में लठमार होली
- 26 फरवरी – नंदगांव और रावल में लठमार होली
- 27 फरवरी – श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा में विशेष होली उत्सव
- 1 मार्च – गोकुल में छड़ी मार होली
- 3 मार्च (सुबह) – चतुर्वेदी समाज का होली डोला
- 3 मार्च (शाम) – होलिका दहन
- 4 मार्च – धुलेंडी (रंगवाली होली)
- 5 मार्च – दाऊजी महाराज (बलदेव) का हुरंगा, नंदगांव और जाव का हुरंगा, मुखराई में चरकुला नृत्य
- 6 मार्च – बठैन और गिडोह का हुरंगा
- 9 मार्च – महावन में छड़ी मार होली
- 12 मार्च – श्री रंगजी मंदिर, वृंदावन में होली उत्सव
होलिका दहन और धुलेंडी
3 मार्च 2026 की शाम को होलिका दहन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्र ग्रहण होने के कारण विशेष सावधानी बरती जाएगी। 4 मार्च की सुबह रंगवाली होली यानी धुलेंडी खेली जाएगी।
बसंत पंचमी से शुरू होता है उत्सव
ब्रज में होली की शुरुआत बसंत पंचमी से मानी जाती है। लगभग 40 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण कराता है। यहां की लठमार होली, फूलों की होली और हुरंगा विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।
ब्रज की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहां हर आयोजन में आध्यात्मिक भाव, परंपरा और आनंद का विशेष मेल देखने को मिलता है। यही कारण है कि ब्रज की होली देश की बाकी होली से अलग और विशेष मानी जाती है।