KNEWS DESK- अयोध्या के तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में खुलकर सामने आते हुए उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को सख्त चेतावनी दी है।
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मुख्यमंत्री योगी पर की गई अभद्र टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सीएम योगी पर टिप्पणी को लेकर संतों में नाराजगी
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणियों को बेहद निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि किसी संत द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग करना सनातन परंपरा के मूल्यों के खिलाफ है।
परमहंस आचार्य के मुताबिक, सीएम योगी उत्तर प्रदेश और सनातन धर्म के हित में निरंतर कार्य कर रहे हैं, ऐसे में उनके प्रति अभद्र भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती।
क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई। जानकारी के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रथ के साथ त्रिवेणी संगम घाट पर जाने से रोका गया था। उन्हें संगम में स्नान करने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद मामला गरमा गया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस कार्रवाई को पुलिस की बर्बरता बताया और नाराजगी जाहिर की। इसके बाद उन्होंने मेला प्रशासन और पुलिस के खिलाफ धरना-प्रदर्शन भी किया।
धरना प्रदर्शन के दौरान और बाद में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कई तंज कसे। उनके इन बयानों के बाद विवाद और गहरा गया। मामला संत समाज से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा में आ गया।
जगतगुरु परमहंस आचार्य की दो टूक चेतावनी
विवाद बढ़ने के बाद अयोध्या के तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य भी खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा—सीएम योगी पर अभद्र टिप्पणी करना एक संत को शोभा नहीं देता। शब्दों को तत्काल वापस लिया जाए। मुख्यमंत्री योगी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। परमहंस आचार्य ने स्पष्ट किया कि माफी नहीं मांगने की स्थिति में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
संत समाज में बढ़ती खींचतान
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संत समाज के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। जहां कुछ संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के रुख पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कई संत सीएम योगी के समर्थन में लामबंद होते नजर आ रहे हैं। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाते हैं।