उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की वजह से बनी वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खाद्य एवं रसद आपूर्ति की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है.उत्तराखंड में जहां कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद है, तो वहीं घरेलू गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं की भी गैस एजेंसियों के सामने लंबी-लंबी लाइन देखने को मिल रही हैं, जिससे प्रदेश में गैस सिलेंडर को लेकर पैनिक सिचुएशन क्रिएट हो गई है. हालांकि सरकार की तरफ से भरोसा दिया गया है, कि प्रदेश में गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है.बावजूद इसके भारत सरकार ने एहतियातन कदम उठाया है. ताकि, भविष्य में एलपीजी की संकट नहीं रहे. शुरुआती दौर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय ने गैस सप्लाई को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया था. इसके बाद बीते शनिवार यानी 14 मार्च को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन में संशोधित कर दिया है. जिसके तहत कोई भी उपभोक्ता एलपीजी और पी एन जी कनेक्शन एक साथ नहीं रख सकता है. लिहाजा, जिन उपभोक्ताओं के घर में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी डोमेस्टिक पीएनजी कनेक्शन हैं, अब उन्हें एलपीजी सिलेंडर रखने, नया कनेक्शन लेने और सिलेंडर को रिफिल कराने की अनुमति नहीं होगी. इसके लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन में संशोधित करने के साथ ही तेल कंपनियों को भी आदेश जारी कर दिया है.लापरवाही करने वालो पर जुर्माना सहित जेल की सजा के भी आदेश दिए गए है.वही बढ़ती गैस की किल्ल्त को लेकर अब सदन से लेकर सड़क तक नई बहस देखने को मिल रही है.और विपक्ष डबल इंजन की सरकार से इस समस्या पर जल्द निदान करने की मांग कर रहा है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण पूरी दुनिया में गैस सिलेंडर और पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर कई तरह की खबरें आ रही हैं, जिसमें भारत भी अछूता नहीं है. भारत में कई राज्यों से गैस सिलडेंरों की किल्लत की खबर सामने आई हैं.राजधानी देहरादून में गैस सिलेंडर की किल्लत ने फिर से लोगों को 90 के दशक की याद दिला दी है,जब सिलेंडर मिलना किसी उपलब्धि से कम नहीं होता था. आज डिजिटल युग में भी शहर की गलियों में एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें, डर और बेचैनी की कहानी बयां कर रही हैं. कभी सिर्फ अमीर परिवारों तक सीमित यह सुविधा अब हर घर की जरूरत बन गई है, लेकिन पुरानी यादों और वर्तमान संकट के बीच आम आदमी का जीवन फिर से उसी संघर्ष की दास्तां कह रहा है. फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों को बिना गैस के बिस्किट खा कर जीवनयापन करना पड़ रहा है. आपको बता दे कि देहरादून के आद्योगिक छेत्र सेलाकुई में सभी मजदूरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक फैक्टरी कर्मचारी से बात की तो उन्होंने बताया कि बिना गैस के एक समय वह खाना फैक्ट्री में खा रहे कही बाहर तो कभी किसी के यहाँ तो कभी मकान मालिक के तो कभी भूखा भी सोना पड़ रहा है । छोटे गैस भराने में भी 600 से 700 रु लिए जा रहे है. जिस से बहुत दिक्कत आ रही है।
प्रदेश में लगातार बढ़ती गैस की किल्लत से आम आदमी को दो चार होना पड़ रहा है, हालाकि सरकार प्रदेश में गैस की कोई कमी न होने का दावा तो करती दिख रही है. लेकिन जनता के हाथ आज भी इस समस्या को लेकर खाली नजर आ रहे है.राज्य सरकार प्रदेशवासियों को आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क बरते हुए है. मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी परिस्थिति में खाद्यान्न, एलपीजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए जिस पर प्रदेश में सड़क से लेकर सदन तक राजनैतिक माहौल भी गरमा गया है.
प्रदेश में लगातार बढ़ती गैस समस्या को लेकर आम जनता परेशान है,कई घंटो इंतजार के बाद भी उनको खाली हाथ ही अपने घरो को जाना पड़ रहा है.आपको बता दे, उत्तराखंड में 44,488 डोमेस्टिक पीएनजी धारक,खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड में 44,488 डोमेस्टिक पीएनजी धारक हैं. जिसमें से देहरादून जिले में 2,200 डोमेस्टिक पीएनजी धारक, हरिद्वार जिले में 25,600 डोमेस्टिक पीएनजी धारक, उधम सिंह नगर जिले में 16,088 डोमेस्टिक पीएनजी धारक हैं.इसके अलावा नैनीताल जिले में 600 डोमेस्टिक पीएनजी धारक हैं. इन सभी डोमेस्टिक पीएनजी धारकों को अलग-अलग कंपनियों के जरिए गैस उपलब्ध कराया जा रहा है. वर्तमान समय में प्रदेश के चार जिलों के कुछ हिस्सों में पाइपलाइन के जरिए गैस उपलब्ध कराई जा रही है. उत्तराखंड में 13 जिले हैं. इन सभी जिलों में पाइपलाइन के जरिए गैस उपलब्ध कराए जाने के लिए 5 कंपनियां काम कर रही है..ऐसे में घरेलू गैस सिलेंडर के साथ कर्मशनल गैस सिलेंडर से प्रदेश में कारोबार का बड़ा संकट देखने को मिल रहा है,जिसको जल्द दूर करना अब सरकार के लिए दिन पर दिन बड़ी चूनौती बनता नजर आ रहा है.जो भविष्य के लिए बेहद बड़ा चिंता का विषय है.