उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड राज्य में सरकार की तिजोरी को मुनाफे से भरने वाले दो सबसे बड़े विभाग रहे है. जिसमे खनन और आबकारी विभाग का नाम जोर शोर से लिया जाता है, वही यही वह दो विभाग है जो हमेशा विपक्ष के निशाने पर भी रहते आए है.वही इस बार विपक्ष को आबकारी से सम्बन्धित मुद्दा मिल गया है जिसके चलते एक बार फिर विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका भी मिलता नज़र आ रहा है. अबकी बार आबकारी विभाग में ठेको के आवंटन को लेकर विपक्ष द्वारा कई सवाल खड़े हो गए है, अब आप पूछेंगे ऐसा क्यों हो रहा है. क्योंकि ठेके तो हर साल आवंटित होते है, लेकिन इस बार ऐसा क्या है. तो आपको बता दे, की उत्तराखंड सरकार ने 1 अप्रैल से प्रदेश में नई शराब की दुकानें खोलने का फैसला लिया है. जिसके बाद इस फैसले के साथ ही प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है. प्रदेश कांग्रेस द्वारा धामी सरकार पर सीधा हमला बोला गया है और सवाल उठाया गया है कि जिस उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ कहा जाता है, उसे शराब के कारोबार का अड्डा बनाने की तैयारी क्यों हो रही है. कांग्रेस अखबारों के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर हल्ला बोलते हुए नज़र आ रही है कि अकेले कुमाऊं मंडल में 55 नई शराब की दुकानें खोलने की अनुमति दी गई है. इनमें जो आंकड़ा सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है, वह पिथौरागढ़ में 15 नई दुकानों और मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले चंपावत में भी 4 नई दुकानो के खुलने का भी है. विपक्ष का मानना है कि जब मुख्यमंत्री के जिले में ही यह हाल है, तो बाकी प्रदेश का हाल क्या होगा. वही इस विषय का असर कई पहाड़ी इलाको और खासकर यात्रारूट पर भी देखने को मिला जिसके चलते नई शराब की दुकाने खोलने का विरोध भी देखा गया, जिसमे बात की जाए तो रुद्रप्रयाग जिले में नशा मुक्त समाज के निर्माण को लेकर महिलाओं ने एक प्रभावशाली पहल करते हुए जनजागरूकता का मजबूत संदेश दिया. त्रियुगीनारायण गांव की महिलाओं ने संगठित होकर त्रियुगीनारायण से सोनप्रयाग तक लगभग 12 किलोमीटर लंबी पैदल रैली निकाली. रैली के दौरान महिलाओं का उत्साह देखते ही बना और पूरे मार्ग में नशे और सरकार के खिलाफ जोरदार नारे लगते नज़र आये. जिसके बाद प्रदेश की सियासत में भी आपसी बहस बाजी शुरू हो गई है.
प्रदेश में जहां धामी सरकार शराब की नई दुकानें खोलने का फरमान जारी कर रही है, वहीं प्रदेश में महिलाएं शराब बंदी को लेकर लामबंद हो गई हैं. गुस्साई महिलाएं नशे के खिलाफ हाथों में तख्तियां लेकर 12 किमी की पैदल रैली निकाल कर शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करती नज़र आई. त्रियुगीनारायण गांव की महिलाएं नशा मुक्ति को लेकर लंबे समय से मुखर हैं और नशे के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़े हुई हैं. वही विपक्ष ने भी सरकार पर शराब की दुकानों के खुलने के विषय को लेकर हल्ला बोला है. आपको बता दे, उत्तराखंड सरकार ने 1 अप्रैल से प्रदेश में नई शराब की दुकानें खोलने का फैसला किया है, और इस फैसले के साथ ही सियासत गरमा गई है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर सीधा हमला बोला और सवाल उठाया कि जिस उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ कहा जाता है, उसे शराब के कारोबार का अड्डा बनाने की तैयारी क्यों की जा रही है. जिसपर भाजपा सरकार आबकारी विभाग की नीति बताती नज़र आ रही है.
एक ओर जहां सरकार राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नई शराब की दुकानों का आवंटन कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अंचलों की महिलाएं अपने गांवों को नशा मुक्त बनाने के लिए आगे आ रही हैं. महिलाओं ने सामाजिक स्तर पर शराब के खिलाफ अभियान छेड़ते हुए गांव में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया है.इस पर अब राजनीतिक दलों में चुनाव आने से पहले एक नई बहस तो जरूर जन्मी है,साथ आरोप प्रत्यारोप की जंग की छिड़ गई है.
पहाड़ी जिलों में अक्सर शराब को लेकर महिलाओ का विरोध बीते लम्बे समय से देखा गया है, लेकिन इस बार नई दुकानों के आवंटन से कही ना कही इसका विरोध बढ़ता दिख रहा है,जो भविष्य के साथ राजनैतिक पार्टियों और सरकार के लिए बड़ा चिंता का विषय बनता जा रहा है. पहाड़ो पर महिलाओ का मानना है की गांव दर गांव में शराब का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है. इसी को देखते हुए महिलाओं ने सामाजिक बुराई के खिलाफ यह ठोस कदम उठाया है. वहीं महिलाओं की यह पहल गांव में सकारात्मक बदलाव लाएगी और नई पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाएगी. महिलाओं के इस निर्णय को स्थानीय लोगों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है और इसे नशा मुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. लेकिन इस और अब ध्यान सिर्फ सरकारों को देना जरूरी होगा जहां एक तरफ हम पहाड़ का पानी और जवानी को बचाने की बात कर रहे है और इसको आर्थिक लाभ के लिए डूबाना भी कोई बुद्धिमानी भी नहीं है. अब देखने वाली बात यह होगी की धामी सरकार इस विषय पर पहाड़ का पानी और जवानी बचाने में सार्थक कदम उठा किस प्रकार कामयाब होती नज़र आएगी।