विपक्ष की पढ़ाई,सत्ता की लड़ाई ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में होने जा रहे वर्ष 2027 विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की सियासत का इन दिनों अलग ही रूप देखने को मिल रहा है. सभी दलों की अपनी अपनी तैयारियां चल रही है, और लगातार चाहे पक्ष हो या विपक्ष हो सभी के शीर्ष नेतृत्व के दिग्गज नेताओं के प्रदेश दौरे होते भी दिखाई दे रहे है.बीते दिनों देखा गया की राजनितिक युद्धमैदान में भाजपा के रथ की कमान संभालने के लिए केंद्रीय गृह व रक्षा मंत्रीयो का प्रदेश आगमन हुआ जिसके बाद बड़ी बड़ी जनसभाओ को उनके द्वारा सम्बोधित भी किया गया, वही अब देश के प्रधानमंत्री मोदी का भी प्रदेश दौरा आगमी 14 अप्रैल को होने जा रहा है.यह तो साफ तौर पर कहा जा सकता है, कि भाजपा ने अपनी पूरी जी जान आने वाले चुनावों को देखते हुए अभी से लगानी शुरु कर दी है. जहाँ एक ओर भाजपा की तैयारी जोर शोर से चल रही है,ऐसे में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भला कैसे पीछे रह सकती है.देखा जा रहा है की लम्बे समय से प्रदेश की सियासत में अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद करती कांग्रेस पार्टी भी अपने शीर्ष नेतृत्व के जरिये मैदान में उतर गई है. कांग्रेस पार्टी की ओर से कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा प्रदेश दौरे पर पहुंची है,और अपने दौरे के दौरान कुमारी शैलजा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंच कांग्रेस के नेताओं के साथ आगामी चुनावों को देखते हुए कई सम्मेलन व संगठनात्मक वृद्धि के लिए बैठके भी कर रही है. कुमारी शैलजा का यह दौरा हालही में प्रदेश कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं को लेकर बढ़ते असंतोष और पार्टी के भीतर बढ़ते आपसी मतभेदो को कम करने के लिए भी माना जा रहा है.वही प्रदेश प्रभारी के पहले दिन का दौरा प्रदेश के रुद्रपुर में रहा जहाँ उनके स्वागत ने शक्ति प्रदर्शन का रूप ले लिया,और कार्यक्रम के दौरान कुमारी शैलजा भाजपा पर कई बयान भी देती नज़र आई, कुमारी शैलजा अपने वक्तव्यों मे कहती नज़र आई कि कांग्रेस में छ: नेताओं के शामिल होने से भाजपा घबरा गई और कांग्रेस पार्टी की बढ़ती ताकत को देख भाजपा द्वारा जल्दबाज़ी में मंत्रिमंडल विस्तार करना पड़ा. कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने भाजपा को मुद्दों से भटक कर राजनितिक संतुलन बनाने जैसे आरोप भी लगाए.कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के आरोपों के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी देखने को मिल रही है.और कुमारी शैलजा के बयानों पर भाजपा भी अपने तंज कस्ती हुई नज़र आ रही है.

उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष के बीच पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा पांच दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचीं. रुद्रपुर में उनके स्वागत ने शक्ति प्रदर्शन का रूप ले लिया, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकता और अनुशासन का संदेश दिया.उत्तराखंड कांग्रेस में हाल ही में शामिल हुए बाहरी नेताओं को लेकर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों के बीच पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा पांच दिवसीय दौरे पर राज्य पहुंचीं. उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को समाप्त करना, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना और आगामी चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत आधार देना है.कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाती है और प्रदेश में वास्तविक बदलाव ला सकती है.इसके साथ ही शैलजा ने भाजपा पर भी प्रहार करते हुए भाजपा में कार्यकर्ताओं में बौखलाहट साथ ही जल्द बड़ी कांग्रेस में जल्द ही नए और बड़े चेहरों वाले  कार्यकर्ताओ के शामिल होने की बात भी की। जिस पर अब दल बदल के साथ आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है. 

कांग्रेस का मानना है की हालही में कांग्रेस में शामिल हुए छह नेताओं की वजह से भाजपा में हलचल मच गई है. उनके अनुसार कांग्रेस की बढ़ती ताकत से घबराकर भाजपा को जल्दबाजी में मंत्रिमंडल विस्तार करना पड़ा.साथ कांग्रेस का आरोप है, की भाजपा सरकार जनता के मुद्दों से भटक रही है,और केवल राजनीतिक संतुलन बनाने में लगी है.कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर संगठन को मजबूत बनाने में जुट जाएं.जिस पर भाजपा ने कांग्रेस को हिदायत देते हुए कहा कि कुमारी शैलजा को पूरी जानकारी प्राप्त करने की भी आवश्यकता है, क्योंकि कांग्रेस में शामिल हुए नेताओं में कुछ का सम्बन्ध भाजपा से कहीं तक नहीं है.उनके अनुसार कांग्रेस पार्टी खुद में हताश व निराश है, और कुमारी शैलजा पांच वर्षों के बाद प्रदेश दौरे पर आई है इसलिए उनको यहाँ की राजनीतिक स्थिति को जानना चाहिए तभी कुछ बोलना चाहिये।

कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी आपने पांच दिन के उत्तराखंड दौरे में इन बैठकों के माध्यम से वह संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन कर रही है.और आवश्यक सुधारों के लिए रणनीति तैयार करेंगी. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब उत्तराखंड कांग्रेस आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है.अब तक अपने दिग्गज नेताओं के बल पर जीत के ताज़ को निहारती कांग्रेस पार्टी के लिए आपसी नाराज़गी और पार्टी की अंधरूनी कलह 2027 विधानसभा चुनावों से पहले कही न कही प्रदेश की सत्ता को पाने के लिए जद्दोजहद करती कांग्रेस पार्टी के लिए काफी चिंताजनक दिखाई देने लगी है और पूरी पार्टी में उथल पुथल भी मची हुई है. वही इस विषय के चलते यह साफ है कि कांग्रेस अपनी पार्टी को दुरुस्त करती हुई दिखाई दे रही है. इस आंतरिक कलह का सीधा फायदा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है, जो पहले से ही मजबूत स्थिति में है. कुल मिलाकर, कांग्रेस के भीतर बढ़ती यह गुटबाजी 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो पार्टी को एक बार फिर सत्ता से दूर रहना पड़ सकता है.

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