उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, आगामी वर्ष 2027 में उत्तराखंड में होने जा रहे, विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की सियासत का अलग ही रंग देखने में को मिल रहा है.जिसमे राजनीतिक दल व क्षेत्रीय दल सभी आते हुए चुनावों को देख अभी से जद्दोजहद करने में लग गये है. स्वाभाविक बात है, कि जब जब चुनावों के मैदान पर राजनीतिक दलों द्वारा खेल खेला जाता है, तब तब नई टीम को भी तैयार किया जाता है. यानी की सभी पार्टियां द्वारा अपने अपने कुनबे को बढ़ाने के लिए व चुनावों में जीत का मुकाम हासिल करने के लिए कार्यकर्ताओं को जोड़ने का सिलसिला शुरु भी कर दिया जाता है.वही प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हर राजनितिक पार्टी के सदस्यता अभियानों में तेज़ी तो देखने को मिल रही है, लेकिन दलबदल का सिलसिला भी बढ़ता नज़र आ रहा है. लगातार सदस्यता अभियानों से कार्यकर्ताओं को जोड़ने का कार्य दलों द्वारा लगातार किया जा रहा है. बीते दिनों प्रदेश भाजपा में कई अन्य दलों से आये योद्धाओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी, और कांग्रेस पार्टी द्वारा भी कई नये शूरवीरों को पार्टी में शामिल किया गया था.वही इन सबके बीच बीते शनिवार को हुए एक और प्रदेश कांग्रेस के सदस्यता अभियान ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, और जो इन दिनों लगातार सुर्खियों में भी बना नज़र आ रहा है.आपको बता दे, कि दिल्ली के एआईसीसी मुख्यालय में शनिवार को प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में प्रदेश भाजपा के कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस पार्टी का दामन थामा है,जो अब तक के बड़े फेरबदल के रुप में भी देखा जा रहा है. क्योंकि इनमे कुछ बड़े चेहरे प्रदेश भाजपा में लम्बे समय रहकर कार्य कर चुके है. साधारण भाषा में यह भी कहा जा सकता है. कि इससे एक बड़ा झटका प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी को भी कही न कही जरूर लगा है.जिसके बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस विषय पर चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है.और एक बार फिर राजनीति के विचारों वाले युद्ध मैदान में पक्ष विपक्ष के बयान बाज़ी के तीर भी चलने शुरु हो गये है.जहाँ एक ओर इसे प्रदेश भाजपा के लिए एक बड़े सदमे के रुप में देखा जा रहा है. तो वही प्रदेश कांग्रेस के लिए यह पल किसी खुशी से कम भी नज़र नही आ रहा है. बरहाल यह तो आने वाले चुनावों के परिणाम ही बता पाएंगे की राजनीतिक दलों में शामिल हो रहे कार्यकर्ता कितने प्रतिशत जीत की ट्रॉफी अपनी पार्टी को दिलाएंगे, लेकिन हालही में हुए कांग्रेस प्रदेश संगठन में आए नए मेहमानों से उनके क्षेत्रों में चुनावी नुकसान कितना होगा इसका भी अब सभी दल आकलन लगाने में जुट गए है.
उत्तराखण्ड की सियासत में बीते शनिवार का दिन प्रदेश कांग्रेस के लिए काफी अहम रहा जब दिल्ली के एआईसीसी मुख्यालय में कांग्रेस पार्टी प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत ,उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उत्तराखंड भाजपा के छ: बड़े नेताओं ने कांग्रेस पार्टी का दामन थामा, भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन करने वालों में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक नारायण पाल, घनसाली विधानसभा से पूर्व विधायक भीमलाल आर्य, रुड़की के पूर्व महापौर गौरव गोयल समेत मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता, लाखन सिंह नेगी शामिल हैं. जिसके बाद कांग्रेस पार्टी में खुशी की लहर देखी जा रही है, कांग्रेस का मानना है, कि भाजपा नेताओं के कांग्रेस का दामन थामने से राज्य में स्पष्ट संदेश गया है, कि भाजपा के दिन अब लद चुके हैं.और भाजपा के नेता भी अब मानने लगे हैं. कि भाजपा का जहाज अब डूबने वाला है, जिसके चलते कांग्रेस पार्टी 2027 में राज्य के भीतर सरकार बनने जा रही है. तो वही भाजपा अपनी सफाई देती हुई नज़र आ रही है।
शनिवार को दिल्ली स्तिथ एआईसीसी मुख्यालय में भाजपा के बड़े चेहरों द्वारा प्रदेश कांग्रेस के दामन थामने के विषय ने भाजपा को बड़ा झटका देने का काम किया है. आपको बता दे की पहले भी प्रदेश भाजपा में लम्बे समय से कार्य कर रहे कुछ कार्यकर्ताओं के आये बयानों ने विपक्ष को भाजपा को घेरने का मौका दिया था, जिसमें गदरपुर विधायक अरविन्द पाण्डेय और पूर्व बीकेटिसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय के नाम काफी हद तक हाईलाइट दिखाई पड़े थें, जिसके बाद भाजपा डैमेज कंट्रोल मे भी जुटती नजर आई थी.वही विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को भी उदाहरण के रूप में पेश किया गया है, कांग्रेस के प्रवक्ताओं का मानना है, कि जिस प्रकार भाजपा की नीतियों से जनता का मोह भंग हो रहा, उसे देखते हुए अब भाजपा के नेताओं का भी पार्टी से मोहभंग होता जा रहा है. और उनका विश्वास कांग्रेस पार्टी की रीतियों और नीतियों में बढ़ गया है. इसलिए प्रदेश भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करके कांग्रेस को मजबूत करने का काम किया है. तो वही सत्ता पक्ष भाजपा विपक्ष पर हल्ला बोलती और अपने दावे पेश करती नज़र आ रही है।
कुल मिलाकर यह तो साफ जाहिर हो रहा है, की आगामी चुनावों को नज़दीक आते देख सभी दलो के द्वारा कमर कसनी शुरु हो गई है, जिसके चलते एक ओर भारी संख्या में सदस्यता दिलाई जा रही है. तो दूसरी ओर दरबदल का सिलसिला भी देखने को मिल रहा है. प्रदेश भाजपा में पहले भी कई नेताओं के बयानों ने कही न कही अंदरखाने आपसी नाराज़गी को जाहिर किया था, जिसके बाद बीते शनिवार को भाजपा के नेताओं द्वारा प्रदेश कांग्रेस में शामिल होने पर इस विषय को भी उदाहरण माना जा रहा है. लेकिन आगामी चुनावों से पहले यदि ऐसी कोई नाराज़गी या मतभेद जिसके कारण नेता अपने दलो को छोड़ दूसरे दलो का दामन थामने का कार्य कर रहे है, तो इस विषय पर पहले गहन चर्चा होनी जरूरी है.अन्यथा आने वाले समय में चाहे कांग्रेस हो ,भाजपा या अन्य कोई दल सभी को भारी नुक्सान का सामना भी करना पड़ सकता हैं।