उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड राज्य को बने हुए 25 वर्ष पूरे हो चुके है. लेकिन बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य योजनाओं और नीतियों से हटकर सरकार के लिए पलायन का मुद्दा अभी भी बड़ी चुनौती के रूप में सरकार के लिए गंभीर विषय बना हुआ है जिसको लेकर राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है. प्रदेश के गांव गांव – शहर शहर कनेक्टिविटी, सड़क, बिजली, पानी, आश्रय, रोजगार सहित अन्य सभी योजनाओं और नीतियों को प्रदेश की जनता तक पहुंचाने में पीछे भी नहीं है. लेकिन बावजूद इसके प्रदेश के कुछ गांव ऐसे भी है जो पूरी तरह से भूतिया व विरान हो चुके है साथ ही कुछ गांव खत्म होने की कगार पर है, जो एक बहुत बड़ा चिंता का विषय भी बनता जा रहा है. वही वर्ष 2025 में राज्य के रजत जयंती से पहले सरकार ने दावा किया था कि अब तक 6000 से अधिक लोगों द्वारा प्रदेश में रिवर्स पलायन किया गया है, लेकिन विपक्ष द्वारा उन सभी आकड़ो को केवल हवा हवाई बताया गया था. कई कार्यक्रम प्रवासी उत्तराखंडीयो को पुनः प्रदेश से जोड़ने के लिए किये गये, लेकिन कुछ खास असर देखने को नही मिल पाया. जिसके चलते अब राज्य सरकार के साथ साथ लोकसभा सांसद व कैबिनेट मंत्री भी इस विषय पर चिंता जताते हुए कई आयोजनों के माध्यम से पलायन की गंभीर समस्या के रोकथाम के लिए कार्य करते भी दिखाई दे रहे है. बरहाल यह तो देखने वाली बात होगी कि सरकार पलायन को रोकने व प्रदेश में रिवर्स पलायन को किस प्रकार गति दे पायेगी लेकिन इस विषय ने एक बार फिर राजनितिक गलियारों में हलचल पैदा करदी है, जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता नज़र आ रहा है तो वही विपक्ष लगातार सरकार पर हल्ला बोलता हुआ भी दिखाई दे रहा है,
सांसद बलूनी ने ग्रामीणों से अपने गांवों को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की और सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेकर रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में आगे बढ़ें. उन्होंने आश्वासन दिया कि पहाड़ के गांवों को पुनर्जीवित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए वे लगातार प्रयासरत रहेंगे.वही भाजपा स्थित कैबिनेट मंत्री पालयन को रोकने और रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में धामी सरकार का बड़ा प्रयास मान रहे है. जिससे संवाद केवल एक बैठक नहीं, बल्कि पहाड़ के भविष्य को बचाने की एक भावनात्मक पहल के रूप में सामने आया, जिसने प्रवासी और स्थानीय ग्रामीणों को अपने गांवों से दोबारा जुड़ने का संदेश दिया.विपक्ष अभी भाई पालयन को लेकर सरकार के दावों को पूरी तरह फेल बताते नहीं थक रहा है.
उत्तराखंड में प्रवासी सम्मेलन 2025 में रजत जयंती उत्सव के रूप में हालि में मनाया गया है। इस सम्मेलन में देश के 11 राज्यों से करीब 199 प्रवासियों शामिल हुए हैं।पलायन आयोग ने अपनी नई रिपोर्ट में बताया है, कि अगस्त 2025 तक प्रदेश में 6282 लोगों ने रिवर्स पलायन किया है। ऐसे में सत्ता पक्ष भविष्य में पलायन को रोकने और पुनर्वास होने पर अपनी बड़ी जीत बता रहा है वही विपक्ष सरकार से पालयन न हो साथ रिवर्स पलायन की रोक थाम को लेकर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है.कांग्रेस का मानना है,मनरेगा इस्कीम को सरकार ने बंद कर दिया है. रोजगार सरकार दे नहीं पा रही, साथ ही रिवर्स पलायन का दावा कर भ्रमित करने का काम किया जा रहा है.
आपको बता दे की पिछले साढ़े चार सालों में करीब 6282 लोग जो प्रदेश से पलायन कर गए थे, उन्होंने रिवर्स पलायन किया है, जो अपने गांव में लौटकर कारोबार कर रहे हैं.साथ ही बताया जा रहा है. कि सीएम ने बैठक के दौरान प्रवासी पंचायत करने के निर्देश दिए हैं. जिन-जिन राज्यों में उत्तराखंड के लोग रह रहे हैं, उनसे संपर्क करते हुए बातचीत किया जाए. रिवर्स पलायन के लिए उनको प्रेरित किया जाए.वही आपको बता दे दूसरी वजह पहाड़ में निर्वाचन क्षेत्रों की लगातार घटती संख्या है. पौड़ी जिले में पहले 8 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र थे, जो अब घटकर 06 रह गए हैं. ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले समय में केवल 4 या 5 विधानसभा रह जाए. इसी प्रकार चमोली जिले में 4 विधानसभा थी, आने वाले समय में 2 रह जाए, ऐसा भी हो सकता है. नैनीताल, पिथौरागढ़ में भी विधानसभा सीटें कम हो रही हैं. ये सभी लोगों के लिए सोचने का विषय है. पहाड़ की आवाज उठाने के लिए पहाड़ को आबाद रखना बेहद जरूरी है.