मोदी का दौरा,विपक्ष के सवाल !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को उत्तराखंड दौरे पर आ रहे हैं. पीएम मोदी इस दौरे के दौरान उत्तराखंड- उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर मौजूद मां डाट काली मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे. दरअसल, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड एक्सप्रेस वे करीब 11,970 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ है. ये एक्सप्रेस वे 210 किलोमीटर लंबा है. इस एक्सप्रेस वे से देहरादून से दिल्ली जाने वाले यात्री महज ढाई घंटे में दिल्ली पहुंच जाएंगे. इसके साथ ही पीएम मोदी उत्तराखंड की हजारों करोड़ रुपए की तमाम परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी करेंगे. इनमें 1000 मेगावाट क्षमता वाले टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट, पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार और बनबसा लैंड पोर्ट शामिल है. इसके बाद प्रधानमंत्री देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. तो वही पीएम मोदी के उत्तराखंड दौरे से पहले ही पिछले साल उत्तराखंड में आई आपदा के दौरान पीएम की ओर से की गई 1200 करोड़ रुपए की घोषणाओं का मामला चर्चाओं में आ गया है। दरअसल, प्रदेश में अगस्त 2025 में आई आपदा के बाद पीएम 11 सितम्बर 2025 को उत्तराखंड आए थे। इस दौरान पीएम ने आपदा को लेकर उच्च स्तरीय बैठक कर 1200 करोड़ रुपए के वित्तीय सहायता की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक कोई सहायता नहीं मिल पाई है। जिस पर अब विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर मोदी के दौरे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए है. विपक्ष का मानना है कि वर्तमान में डबल इंजन की सरकार है, और इस सरकार में आपदा का धन उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो इससे गंभीर विषय दूसरा कोई ही नहीं सकता है। लिहाजा, डबल इंजन सरकार की संवेदनशीलता दैवीय आपदा में दिखाई दे रही है।जिसके चलते भाजपा सरकार से विपक्षी दलों ने जवाब माँगा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने आने वाले हैं. उनके उत्तराखंड दौरे की तैयारियां जोरों से चल रही हैं. जहां एक ओर पुलिस प्रशासन विभाग सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का रोडमैप में तैयार कर चुका है, तो वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य और परिवहन विभाग की ओर से भी तमाम रण नीतियां तैयार की गई हैं. पीएम की जनसभा में आने वाले लाभार्थियों के लिए परिवहन विभाग 2300 बसों की व्यवस्था कर रहा है. सभी अन्य संबंधित विभाग भी अपने-अपने तरीके से व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर रहे हैं. इस बीच प्रधानमंत्री के दौरे से पहले विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर आपदा के समय पीएम के 1200 करोड़ रुपयों से जुड़े विषयों को लेकर कई सवाल खड़े किए है. तो वही 1200 करोड़ रुपए की घोषणाओं के एवज में राज्य को प्राप्त धनराशि के सवाल पर आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन का कहना है कि ये प्रक्रिया अंतिम चरण में है, कुछ दिन पहले ही भारत सरकार के साथ मुख्य सचिव की बैठक हुई है, ऐसे में बहुत जल्द ही पैसा राज्य को प्राप्त हो जाएगा.

आपको बता दे,उत्तराखंड में आपदा को आये लगभग एक साल का समय पूरा होने जा रहा है. जिस आपदा से थराली धराली में बड़ा सैलाब आने के कारण जानमाल का करोडो का नुकसान बीते समय पर हुआ था,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस आपदा के दौरान अपना कैम्प लगा कर जनसमस्याओं को सुनते भी नजर आए थे साथ ही हर सम्भव मदद का आश्वाशन सरकार के द्वारा दिया भी गया था, अब प्रधानमंत्री देहरादून के दौरे पर 14 अप्रैल को आ रहे है. लेकिन प्रधानमंत्री के इस दौरे से विपक्षी दल नाखुश नजर आ रहा है. विपक्ष आपदा के जख्मों को भरने की बात पर अड़ा है तो वही भाजपा का मानना है की कांग्रेस का उत्तराखंड के जन सरोकारों से कोई ताल्लुक नहीं है, बल्कि वो केवल आरोप और प्रत्यारोप की राजनीति पर विश्वास करती है. आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए कुछ धनराशि आमंत्रित हुई है और कुछ प्रक्रिया में है. ऐसे में जल्द ही बची हुई धनराशि भी जारी कर दी जाएगी, लेकिन विपक्ष इस पर भी राजनीति करता नजर आ रहा है.

उत्तराखंड राज्य में मानसून के दौरान 5 अगस्त 2025 को धराली- हर्षिल में आपदा आने में बाद प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में आपदा आने का सिलसिला शुरू हुआ था. इसके बाद भारी बारिश के चलते उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, उधमसिंह नगर और देहरादून में भी आपदा जैसे हालात बने थे. जिसको देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से नुकसान का आंकलन किया गया और विभाग ने करीब 5702.15 करोड़ रुपए का मेमोरेंडम तैयार कर भारत सरकार को भेजा गया था, उसी दौरान उत्तराखंड दौरे पर आए पीएम मोदी ने उत्तराखंड को तात्कालिक राहत पैकेज के रूप में 1200 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इस राहत पैकेज से राज्य को कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ है. अब प्रधानमंत्री अपने दौरे पर मंगलवार को आ रहे है. जिसमे वो दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे.साथ ही बड़ी जनसभा को सम्बोधित करते हुए कई चुनावी घोषणाएं भी कर सकते है.ऐसे में विपक्ष का दल प्रधानमंत्री से मुलाकात करने की जद्दोजहद में अभी से अपने सवालों को लेकर समय मांगता नजर आ रहा है, ऐसे में उठते सवालों से विषय गंभीर दिखाई दे रहा है और यदि अभी भी कुछ अनियमियताये है तो उसको पूरा करने की जरूरत है, वरना विपक्ष के सवाल भी जायज़ होते दिखाई देंगे।