बजट का सवाल,विपक्ष का बवाल ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आज से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया है. सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे राज्यपाल के अभिभाषण से हुई. इसमें सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का खाका सदन के सामने रखा गया है. बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार की पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों के साथ-साथ आगामी योजनाओं और नीतिगत प्राथमिकताओं का उल्लेख किया है. इस अभिभाषण को सरकार के दृष्टिकोण और आगामी विकास योजनाओं की दिशा के रूप में देखा जाता है. राज्यपाल के अभिभाषण के बाद दोपहर 2 बजे विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण सदन में अपने विचार रखें और सत्र की कार्यवाही को आगे बढ़ाया. इसके बाद शाम 3 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया…..जो इस बार का प्रदेश का बजट है 1 लाख 11 हजार करोड़ रूपये सरकार के इस बजट पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई थी. माना जा रहा है कि बजट में आधारभूत ढांचे के विकास, रोजगार, पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और युवाओं के लिए नई योजनाओं की घोषणाओ के आधार पर हैं. गैरसैंण में आयोजित होने वाला यह बजट सत्र राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार अपने कार्यकाल के चार साल पूरे होने की ओर बढ़ रही है. ऐसे में सरकार अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के जरिए जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड भी पेश करेगी. वहीं बजट सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की संभावना जताई जा रही है. प्रदेश से जुड़े जनहित के मुद्दों, विकास कार्यों, बेरोजगारी और महंगाई जैसे विषयों पर सदन में चर्चा होने की उम्मीद है.जिस पर आज सुबह से ही विपक्ष द्वारा सदन के बाहर सत्र की कम अवधि को बढ़ाने और प्रदेश के जटिल मुद्दों पर चर्चा न करने पर हल्ला काटा गया है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी राज्य बजट को लेकर बड़ा उत्साह व्यक्त किया है। उन्होंने इसे एक “शानदार” बजट बताया, जो समाज के हर वर्ग की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा। सीएम ने कहा कि इस बजट को तैयार करने के लिए विभिन्न हितधारकों, समूहों और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों से सुझाव लिए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बजट न केवल विकासोन्मुखी होगा, बल्कि समावेशी भी होगा, जिसमें हर तबके के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और सदन की अवधि पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।वही आज बजट सत्र को लेकर विपक्ष ने भाजपा सरकार पर कम समय और आम जनता के सवाल सत्र में न उठाए जाए इस वजह से सत्र की अवधि कम करने का गंभीर आरोप लगा रही है.

आपको एक नजर में बता दे, गैरसैंण में कब- कब आहूत हुआ विधानसभा सत्र

9 से 11 जून 2014 तक गैरसैंण में टेंट में विधानसभा विशेष सत्र आहूत हुआ था.
2 से 3 नवंबर 2015 तक गैरसैंण में टेंट में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.
17 से 18 नवंबर 2016 तक गैरसैंण के भराड़ीसैंण में बने स्थायी विधानसभा भवन में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.
7 से 8 दिसंबर 2017 तक भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में सत्र आहूत हुआ था.
20 से 26 मार्च 2018 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
साल 2019 में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में कोई भी सत्र आहूत नहीं हुआ.
3 से 7 मार्च 2020 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
1 से 6 मार्च 2021 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
साल 2022 में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में कोई भी सत्र आहूत नहीं हुआ.
13 से 16 मार्च 2023 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
21 से 23 अगस्त 2024 तक भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.
19 से 20 अगस्त 2025 तक भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.

सत्र की अवधि को बढ़ाने की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर कांग्रेस विधायकों ने हाथों में पट्टिकाएं पकड़ कर प्रदर्शन किया. कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी, हरीश धामी, प्रीतम सिंह, मनोज तिवारी और अनुपमा रावत ने भी सरकार पर निशाना साधा. उनका कहना है कि सरकार ने पहले से ही बजट सत्र की अवधि तय कर दी है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है. वही भाजपा ने विपक्ष पर प्रहार करते हुए तंज कसा है.

 

कुल मिला का कर धामी सरकार का 2026 -2027 बजट आज पेश हो गया है. लेकिन विपक्ष इस बजट और सदन की अवधि से नाखुश नजर आया है, मानना है की प्रश्नकाल के दौरान जनता से जुड़े कई अहम सवाल उठाए जाने थे, लेकिन सत्र की सीमित अवधि के कारण उन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाएगी. कांग्रेस विधायकों ने इसे सरकार की विफलता करार देते हुए कहा कि यदि सरकार के पास काम और एजेंडा होता तो सत्र को लंबा चलाने से परहेज नहीं किया जाता. सरकार बच कर भागने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे.उम्मीद जताई जा रही है की आगे चलने वाला सत्र काफी हंगामेदार होगा।

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