दावों की धार, सवालों की मार !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सियासी पारा चढ़ने लगा है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों ही चुनावी रणभूमि में अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद में जुटे हैं। इसी बीच सरकार के दो दिवसीय विधानसभा सत्र के अनिश्चितकालीन स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में अपने संबोधन के जरिए सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया, तो वहीं विपक्ष पर भी तीखे राजनीतिक हमले भी किए। मुख्यमंत्री के इस संबोधन को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।सीएम धामी ने रोजगार, सरकारी भर्तियों, सड़क कनेक्टिविटी, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। इसके साथ ही युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार भर्तियां जारी रखने का दावा किया और दस हजार नौकरियों के लिए तैयार भर्ती कैलेंडर को पूरा करने का भरोसा दिलाते हुए अब तक 35 हजार से अधिक नियुक्ति किए जाने का जिक्र करते हुए सरकार की रोजगार संबंधी पहल को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, खराब सड़कों की समस्या दूर करने और पलायन पर अंकुश लगाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर सरकार की योजनाओं और प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए उन्होंने विकास के मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। इसके अलावा, राष्ट्रीय महत्व से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं व उससे जुड़े पुनर्वास और आर्थिक व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री ने जानकारी दी। उधर, सत्ता पक्ष भी मुख्यमंत्री धामी द्वारा गिनाएं गये कार्यों की सरहाना कर रहा है लेकिन विपक्ष ने सरकार के सभी दावों पर नए सवाल खड़े किये है। इस बीच सियासी बयानबाज़ी तेज़ होती नज़र आ रही हैं।

उत्तराखंड में 2027 के चुनाव का काउंटडाउन शुरू होते ही सियासी रण में वार पलटवार तेज हो गया है। दो दिवसीय विधानसभा सत्र के अनिश्चितकालीन स्थगित होते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन से ऐसा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की, जिसके केंद्र में सरकार की उपलब्धियां भी रहीं और विपक्ष पर निशाना भी। मुख्यमंत्री धामी ने विधानसभा से सरकार के कामकाज का हिसाब रखते हुए विपक्ष को सवालों के घेरे में खड़ा किया। रोजगार से लेकर सड़क, पलायन से लेकर महिला सशक्तिकरण तक, सीएम ने हर उस मुद्दे को छुआ, जो 2027 चुनाव में सियासत की दिशा तय कर सकता है। सीएम ने 10 हजार नौकरियों के भर्ती कैलेंडर को समय पर पूरा करने का भरोसा दिया और अब तक 35 हजार से अधिक नियुक्तियां करने का दावा पेश किया। ये संदेश ऐसे वक्त आया है जब रोजगार का मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में है। वहीं पहाड़ की बदहाल सड़कों, पलायन की चुनौती और महिला सशक्तिकरण पर सरकार की प्राथमिकताएं गिनाईं। राष्ट्रीय महत्व की परियोजना, पुनर्वास और आर्थिक व्यवस्था का जिक्र कर विकास के मोर्चे पर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। लेकिन विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने का काम किया है। जिस पर जमकर राजनीति भी हो रही है।

कुलमिलाकर, सरकार का अंत्रिम विधानसभा सत्र भले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया हो, लेकिन सियासती बयानबाज़ी अब और तेज होने जा रही है। मुख्यमंत्री धामी ने सदन से सरकार की उपलब्धियां गिनाकर 2027 के चुनाव से पहले अपना राजनीतिक एजेंडा स्पष्ट करने की कोशिश की है। रोजगार, सरकारी भर्तियां, पलायन, सड़कें और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों के जरिए सरकार ने विकास का खाका सामने रखा, तो अब विपक्ष की चुनौती इन दावों पर सवाल उठाने और जनता के सामने अपना विकल्प पेश करने की होगी। वही, सवाल सिर्फ 35 हजार नियुक्तियों के दावे या दस हजार नौकरियों के भर्ती कैलेंडर का नहीं, बल्कि उन उम्मीदों का भी है, जिनके साथ प्रदेश का युवा रोजगार की राह देख रहा है। पहाड़ों में पलायन रोकने और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती भी सरकार के सामने बनी हुई है। ऐसे में 2027 का चुनावी मुकाबला केवल आरोप प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा या जनता के असल मुद्दे सियासत की दिशा तय करेंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा।

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