अनुभव का अभाव,चुनाव पर प्रभाव ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड राज्य की सियासत में आजकल केवल मंत्रिमंडल से सम्बन्धित ही चर्चा सुनाई दे रही है. लम्बे समय के इंतज़ार व कई आस लगाने के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री धामी ने काफी समय से रिक्त पड़ी धामी कैबिनेट की पांच सीटों को भर दिया है. इसके साथ ही धामी कैबिनेट अब पूर्ण रूप से 12 सदस्यों वाली हो गई है. उत्तराखंड की राजनीति में चैत्र नवरात्र का दूसरा दिन यानी कि 20 मार्च एक अहम दिन रहा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए पांच नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया. इस विस्तार में भाजपा के पांच विधायक मदन कौशिक, भरत चौधरी, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैडा और खजान दास को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. आपको बता दें, कि आगामी 2027 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होने जा रहे है. और उससे कुछ महीने पहले आचार संहिता भी लग जाएगी जिससे कहा जा सकता है. कि लगभग 8 से 9 महीनों तक की ही अवधि सरकार के पास कार्य करने की रह गई है. वही हमेशा विपक्ष जिस प्रकार पहले मंत्रिमंडल विस्तार करने को लेकर सरकार को घेरता नज़र आ रहा था, तो अब मंत्रिमंडल के विस्तार हो जाने के बाद भी नाखुश दिखाई दे रहा है.और एक बार फिर धामी कैबिनेट की टीम पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है. विपक्ष का मानना है, कि कैबिनेट में मंत्री बनने के बाद मिले हुए विभाग में कम से कम 6 माह की अवधि विभाग के कार्यों को समझने में लगती है, लेकिन हाल ही में कम समय के लिए विस्तार हुई धामी कैबिनेट का कोई मतलब भी नहीं बनता और इतने कम समय में किस प्रकार से कार्य किये जाएंगे वह भगवान भरोसे है. बरहाल यह तो देखने वाली बात ही है.की कम समय की अवधि में धामी कैबिनेट के खिलाड़ी किस प्रकार से विपक्ष के सवालों के मैदान पर खरा उतरेंगे लेकिन कही न कही विपक्ष को अब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक और मौका सरकार और सत्ता पक्ष को घेरने को मिल गया है.और विपक्ष के आरोप के बाद सत्ता पक्ष के प्रत्यारोप का दौर भी शुरु हो गया हैं. जिसके चलते अब बयानों बाजियो के तीर राजनीतिक गलियारों में तेजी से चलने शुरु हो गये है.

उत्तराखंड में भाजपा सरकार के दूसरे टर्म में पहली बार फुल फ्लेज 11 मंत्रियों वाली मंत्रिमंडल की बैठक हुई. कैबिनेट विस्तार के बाद यह पहला मौका था जब सारे मंत्री नए पुराने एक साथ बैठे थे. नए मंत्री जो कि पहली बार विधायक से मंत्री बने हैं, उनके चेहरे काफ़ी खिले हुए नजर आए. नए मंत्री नई ऊर्जा के साथ कैबिनेट बैठक में पहुंचे. तमाम नए मंत्री जो पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल हुए इनकी ऊर्जा देखने लायक थी. पहली बार मंत्री बने लोगों में राम सिंह कैड़ा, भारत चौधरी और प्रदीप बत्रा काफ़ी खुश, जोश में और आत्मविश्वास के साथ नज़र आये. खजान दास और मदन कौशिक के पास मंत्री रहने का पहले भी अनुभव रहा है.अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ये मंत्री सूट बूट पहने नई ऊर्जा के साथ नजर आए. इन मंत्रियों ने कैबिनेट बैठक में शामिल होने का अनुभव साझा किया.वही विपक्ष जिस प्रकार पहले मंत्रिमंडल विस्तार करने को लेकर सरकार को घेरता नज़र आ रहा था, तो अब मंत्रिमंडल के विस्तार हो जाने के बाद भी नाखुश दिखाई दे रहा है.और एक बार फिर धामी कैबिनेट की टीम पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है.

धामी के नए मंत्रिमंडल विस्तार पर अब नई बहस शुरू हो गई है.जहाँ कांग्रेस पार्टी सत्ता दल भाजपा में लम्बे समय से काम कर रहे कार्यकर्ता और दिग्गज नेताओं पर चुटकी लेती नजर आ रही है.आगामी 2027 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होने जा रहे है. और उससे कुछ महीने पहले आचार संहिता भी लग जाएगी जिससे कहा जा सकता है. कि लगभग 8 से 9 महीनों तक की ही अवधि सरकार के पास कार्य करने की रह गई है.कैबिनेट में मंत्री बनने के बाद मिले हुए विभाग में कम से कम 6 माह की अवधि विभाग के कार्यों को समझने में लगती है,इतने कम समय में किस प्रकार से कार्य किये जाएंगे वह भगवान भरोसे है.वही भाजपा में भी विपक्ष के इस हमले को लेकर वार किया है.

   

राजनीतिक जानकार की मानें तो यह मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा भी है.भाजपा ने साफ संकेत दिया है. कि वह चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले चेहरों को तरजीह दे रही है,चाहे वे किसी भी दल से आए हों.साथ ही नए मंत्रियों को मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है,कि जिस उम्मीद पर प्रयोजन के साथ नए लोगों को शामिल किया गया है,वो काम सब पूरे होने चाहिए.पब्लिक के सारे काम होने चाहिए और जनता के बीच सभी मंत्रियों को अधिकतम उपस्थिति दर्ज होनी चाहिए.अब ऐसे में बड़ी चूनौती इन नए मंत्रियो के साथ ही अन्य मंत्रियो के सामने कम समय को लेकर आ चुकी है.क्योकि मंत्रालय लेकर बैठे इन मंत्रीयो को अब जनता के कामों के साथ अपने छेत्र में भी परफोर्मस दिखना पड़ेगा,अब  2027 का चुनाव जीत के लिए करो या मारो की स्थिति बन गया है.ऐसे में जनता मंत्रियों के कामो को देख कर ही अगली बार सत्ता का स्वाद इनको चक्खा पायेगी।

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