डिजिटल डेस्क- चारधाम यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। उत्तराखंड में प्रशासन और मंदिर समितियां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम कर रही हैं। इसी कड़ी में गंगोत्री धाम में दर्शन और आरती के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जिससे इस बार यात्रियों को अधिक समय तक मां गंगा के दर्शन का अवसर मिल सकेगा। मंदिर समिति द्वारा आयोजित बैठक के बाद यह फैसला लिया गया कि अब श्रद्धालु सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक गंगोत्री धाम में दर्शन कर सकेंगे। पहले यह समय सीमित था और दोपहर 2 बजे तक ही दर्शन की अनुमति थी। इस बदलाव से खासकर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
विस्तृत समय सारणी तैयार
मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत समय सारणी तैयार कर ली गई है। साथ ही, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से होने जा रही है। इस दिन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह लगभग 8 बजे खुलेंगे, जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 6:15 बजे खोले जाएंगे।
दिन में दर्शन न कर पाने वाले श्रद्धालुओं को शाम को मिलेगा दोबारा मौका
नई व्यवस्था के अनुसार, जो श्रद्धालु दिन में दर्शन नहीं कर पाएंगे, उन्हें शाम की आरती के बाद भी दर्शन का मौका मिलेगा। गंगोत्री धाम में शाम की आरती 7:45 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद रात 10 बजे तक दर्शन किए जा सकेंगे। यह निर्णय विशेष रूप से उन यात्रियों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो देर से पहुंचते हैं। इस बीच, प्रशासन भी चारधाम यात्रा को सफल और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गया है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर आने वाले होटल, लॉज, रिसॉर्ट और होमस्टे संचालकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी होटल मालिकों को अपनी दरें यात्रा शुरू होने से पहले जिला पर्यटन कार्यालय से अनिवार्य रूप से मंजूर करानी होंगी, ताकि श्रद्धालुओं से मनमानी वसूली को रोका जा सके।