उत्तराखंड: प्री SIR पर निर्वाचन दुरुस्त, राजनैतिक दल क्यों सुस्त !


उत्तराखंड- उत्तराखंड में प्रस्तावित विशेष गहन संशोधन SIR से पहले प्री- एसआईआर की प्रक्रिया जारी है, ताकि एस आई आर के दौरान बीएलओ को जानकारियां और डॉक्यूमेंट एकत्र करने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखंड राज्य में प्री- एस आई आर एक्टिविटी 4 दिसंबर 2025 को शुरू की गई थी। उससे पहले ही उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से राजनीतिक पार्टियों के साथ बैठक कर बीएलए की नियुक्ति पर जोर दिया गया था लेकिन एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद अभी तक राजनीतिक पार्टियों की ओर से तय बीएलए की नियुक्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते है की बीएलए नियुक्त करने में सुस्त राजनीतिक दल कोई आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं और वोटर लिस्ट में अपना बड़ा नुक्सान न कर लें ,उत्तराखंड में प्री एसआईआर गतिविधियां जोर शोर से चल रही हैं। इस चरण में प्रदेश में आगामी दिनों में होने वाले विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर शुरुआती तैयारियां की जा रही हैं। साथ ही एसआईआर के दौरान मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा ना हो, इसके के लिए प्रत्येक मतदाता तक पहुंच, समन्वय और संवाद अभियान चलाया जा रहा है। आपको बता दें, उत्तराखंड में 11,733 बूथ हैं, प्रदेश में कुल बूथों की संख्या 11,733 है। ऐसे में इन सभी बूथों पर हर राजनीतिक पार्टी की ओर से बीएलए नियुक्त किए जाने हैं, ताकि एसआईआर की प्रक्रिया को बेहतर और पारदर्शी तरीके से संचालित किया जा सके लेकिन राजनीतिक पार्टियों की ओर से नियुक्त किए गए बीएलए की संख्या इस बात को बयां कर रही है, कि उनका ज्यादा फोकस नहीं है या फिर उनको बीएलए बनाने के लिए कार्यकर्ता नहीं मिल रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि उत्तराखंड में दो ही मुख्य पार्टियां हैं, जिनके पास पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है बावजूद इसके बीएलए नियुक्त न हो पाना, तमाम तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

एसआईआर का अर्थ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन है। ये चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को पूरी तरह सही और अपडेट करना है। एस आई आर के तहत वोटर लिस्ट से उन लोगों के नाम हटाने हैं,जो अब वहां नहीं रहते हैं जिनका निधन हो चुका है। जिनके दो जगह नाम हैं। इसके साथ ही नए पात्र वोटरों को जोड़ना है। इसमें बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे करते हैं। अगर सर्वे के समय किसी वोटर की डिटेल में गड़बड़ी प्राप्त होती है, या वो घर में नहीं मिलता है, तो उसको सत्यापन की श्रेणी में डाला जाता है। उत्तराखंड में 11,733 बूथ हैं, प्रदेश में कुल बूथों की संख्या 11,733 है अभी तक राजनीतिक दलों की ओर से 8,700 बीएलए ही नियुक्त किए गए हैं। ऐसे में इन सभी बूथों पर हर राजनीतिक पार्टी की ओर से बीएलए नियुक्त किए जाने हैं, ऐसे में दिलचस्प बात ये है कि उत्तराखंड में दो ही मुख्य पार्टियां हैं, जिनके पास पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है बावजूद इसके बीएलए नियुक्त न हो पाना, तमाम तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा कहना है कि उत्तराखंड में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए पार्टी स्तर से बीएलए की नियुक्ति की जा रही है। वर्तमान समय तक करीब 5,300 बीएलए नियुक्त किया जा चुके हैं जबकि 4,700 बीएलए की सूची भी तैयार है, जिसका वेरिफिकेशन चल रहा है। ऐसे में जनवरी महीने के अंत तक बीएलए नियुक्ति की प्रक्रियाएं पूरी करते हुए सभी बूथों पर बीएलए नियुक्त कर दिए जाएंगे। वहीं कांग्रेस का दावा है प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर पहले बीएलए- 1 नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। ऐसे में सभी विधानसभा सीटों पर बीएलए- 1 नियुक्त किए जाने के बाद बीएलए- 2 नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। अभी तक प्रदेश भर में 58 से 65 फीसदी बीएलए- 2 की नियुक्ति की जा चुकी है। पार्टी स्तर से करीब 65 से 66 विधानसभा सीटों पर बीएलए- 2 की सूची तैयार हो चुकी है। 15 से 20 जनवरी तक सभी बूथों पर बीएलए- 2 नियुक्ति कर सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को सौंप दी जाएगी। वहीं अन्य दलों की भी (SIR) को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आई है।

कुल मिलकर आपको अवगत करें तो उत्तराखंड में 11,733 बूथ हैं, प्रदेश में कुल बूथों की संख्या 11,733 है। अभी तक राजनीतिक दलों की ओर से 8,700 बीएलए ही नियुक्त किए गए हैं जिसमें अभी 3,033 बीएलए की नियुक्ति बाकी है,प्रदेश में प्री एसआईआर की गतिविधियां शुरू हुए एक महीने से ज्यादा का समय बीत गया है लेकिन अभी तक प्रदेश के पूरे 11,733 बूथों पर राजनीतिक पार्टियों की ओर से बी एल ए की नियुक्ति नहीं हो पाई है जबकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से इस संबंध में कई दौर की बैठकें भी की जा चुकी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, अभी तक राजनीतिक दलों की ओर से 8,700 बीएलए ही नियुक्त किए गए हैं। इनमें से प्रदेश की एक मुख्य राजनीतिक पार्टी की ओर से सबसे अधिक 5,300 बीएलए नियुक्त किए गए हैं जबकि दूसरी मुख्य राजनीतिक पार्टी की ओर से 3,200 बीएलए ही नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा, 200 बी एल ए अन्य राजनीतिक पार्टियों की ओर से नियुक्त किए गए हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है,क्या राजनैतिक पार्टियों के पास कार्यकर्ता नहीं है अगर है भी तो कोई भी दल प्री एस आई आर को सीरियस नहीं ले रहा है,जिसकी वजह से प्रक्रिया धीमी गति में है।

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