डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट अभिभाषण पर चर्चा के दौरान हंसी का फव्वारा फूट पड़ा, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व सपा सरकार के शिक्षा मंत्री से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया। सीएम योगी ने बताया कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सपा सरकार का शिक्षा मंत्री मुख्य अतिथि बनाया गया था। सीएम योगी ने बताया कि मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सवाल किया कि बिस्मिल्लाह खां को तो हाल ही में पुरस्कार मिला था, उन्हें फांसी क्यों दे दी गई। जब मंच पर बैठे किसी ने सुधार करने की कोशिश की तो मंत्री ने उसे तुरंत भाजपा समर्थक बता दिया। सीएम ने कहा, “इसी को अंधेर नगरी चौपट राजा कहते हैं। जब मंच के नीचे बैठे सज्जन ने शिक्षामंत्री से कहा कि यह पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस का कार्यक्रम है तो उनसे कहा गया – तू जरूर भाजपाई होगा, भाग हमारे कार्यक्रम से। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था चौपट होने वाली थी।”
शिक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह खां और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के बीच अंतर नहीं जानते हैं- सीएम योगी
सीएम ने यह भी बताया कि शिक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह खां और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के बीच अंतर तक नहीं समझ पा रहे थे। योगी ने कहा, “जहां आपका शिक्षा मंत्री इतना असमंजस में था, वहां बच्चे नकल नहीं करेंगे तो क्या करेंगे। यही हाल उस समय यूपी की शिक्षा व्यवस्था का था।” सीएम योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार की एक और हास्यजनक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब एक रेलवे स्टेशन पर तत्कालीन सपा सरकार के अधिकारी और माध्यमिक शिक्षा मंत्री मौजूद थे।
अधिकारी और मंत्री के न पहचान पाने की घटना का किया जिक्र
अधिकारी मंत्री को पहचान नहीं पाए क्योंकि मंत्री छह महीने से सचिवालय नहीं गए थे। योगी ने कहा कि जिस सरकार में अधिकारी और मंत्री एक-दूसरे को पहचान नहीं पाते, उसका हाल तो बुरा होना ही था। इस घटना से विधानसभा में हंसी और हलचल मच गई। सीएम ने इसे उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए पूर्व सरकार की कामकाज और प्रशासनिक ढीलेपन पर कटाक्ष किया। इस प्रकार, पूर्व शिक्षा मंत्रियों की चूक और भूल-भाल की घटनाएं जनता और सदन दोनों में चर्चा का विषय बनीं।