उन्नाव कांड: कुलदीप सिंह सेंगर की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट में रोजाना सुनवाई, 11 फरवरी से होगी शुरुआत

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव कांड के आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई मौत से जुड़े मामले में सेंगर की अपील पर रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तारीख तय की है और इसे डेली हियरिंग के लिए सूचीबद्ध किया है। कुलदीप सिंह सेंगर ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा और दोषसिद्धि को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हालांकि, इससे पहले उनकी सजा निलंबन की याचिका को हाई कोर्ट खारिज कर चुका है। कोर्ट का मानना रहा है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें किसी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।

अभी हाल में ही मिली थी जमानत

यह मामला उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा हुआ है। ट्रायल कोर्ट ने इस केस में कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिरासत में मौत जैसे गंभीर अपराध में जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। इससे पहले 23 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दे दी थी। हालांकि, इस आदेश के बाद मामला गरमा गया और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के बेल आदेश पर तुरंत रोक लगा दी थी।

9 साल की सजा काट चुका है कुलदीप सेंगर

सजा निलंबन की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की हिरासत में मौत के मामले में कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती। कोर्ट ने साफ कहा था कि ऐसे मामलों में समाज और न्याय व्यवस्था को कड़ा संदेश देना जरूरी है। इस केस में कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य आरोपियों को भी 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। सभी को पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दोषी पाया गया था। अपनी दलील में कुलदीप सिंह सेंगर ने कोर्ट को बताया था कि वह करीब 9 साल की सजा पहले ही काट चुका है और उसकी केवल 11 महीने की सजा शेष है। हालांकि, पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील महमूद प्राचा ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि सेंगर को रिहा किए जाने से पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

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