डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के 9 साल पूरे होने के साथ ही महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक समय जहां प्रदेश में महिला सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय हुआ करता था, वहीं अब कानून-व्यवस्था, तकनीक और सामाजिक पहल के मेल से एक नया मॉडल उभरकर सामने आया है। सरकार ने इस चुनौती को केवल पुलिसिंग तक सीमित न रखते हुए सामाजिक बदलाव के एजेंडे के रूप में लिया, जिसका असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। महिला सुरक्षा की दिशा में सबसे अहम कदम रहा जीरो टॉलरेंस नीति का सख्ती से पालन। 2017 के बाद अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट और एनएसए जैसे कानूनों का प्रभावी इस्तेमाल और अवैध संपत्तियों की जब्ती ने अपराध के नेटवर्क को कमजोर किया। इसका परिणाम यह हुआ कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में गिरावट दर्ज की गई और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की भावना मजबूत हुई।
हर थाने में स्थापित मिशन शक्ति केंद्र
इस बदलाव में मिशन शक्ति अभियान की बड़ी भूमिका रही है। प्रदेश के हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए और करीब 40,000 पुलिसकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया। महिला अपराध से जुड़ी सभी इकाइयों को एक छत के नीचे लाकर कार्रवाई को तेज और प्रभावी बनाया गया है। आंकड़े भी इस बदलाव की गवाही देते हैं। सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच दुष्कर्म के मामलों में 33.92%, महिलाओं और बच्चों के अपहरण में 17.03%, दहेज हत्या में 12.96% और घरेलू हिंसा में 9.54% की कमी दर्ज की गई। इतना ही नहीं, महिला एवं बाल अपराधों के निस्तारण में 98.90% की दर के साथ उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बनकर उभरा है, जबकि पेंडेंसी रेट महज 0.20% है।
महिला सुरक्षा को जमीनी स्तर तक किया गया मजबूत
महिला सुरक्षा को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए बीट पुलिसिंग को भी सशक्त किया गया है। करीब 19,839 महिला पुलिसकर्मियों की नियुक्ति और 9,172 महिला बीट्स का गठन किया गया है। इसके अलावा पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20% आरक्षण लागू किया गया, जिससे आज 44,000 से अधिक महिलाएं पुलिस बल का हिस्सा बन चुकी हैं। तकनीक के उपयोग ने भी इस मॉडल को मजबूत किया है। UPCOP App, प्रहरी बीट पुलिसिंग एप और यक्ष एप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक सेवाएं तेज हुई हैं और अपराधियों की निगरानी आसान हुई है। 50 लाख से अधिक लोग इन ऐप्स को डाउनलोड कर चुके हैं, जबकि 2 करोड़ से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। साथ ही, पूरे प्रदेश में 12 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों की स्थापना से निगरानी तंत्र और मजबूत हुआ है। महिला हेल्पलाइन सेवाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है। 1090, 181 और यूपी-112 जैसी सेवाओं को एकीकृत कर तेज रेस्पॉन्स सिस्टम तैयार किया गया है। यूपी-112 का रिस्पांस टाइम घटकर 6 मिनट 41 सेकंड रह गया है, जिससे आपात स्थिति में मदद तेजी से पहुंच रही है।