शिव शंकर सविता- कानपुर के चर्चित बिकरू कांड से जुड़े एक अहम मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बिकरू मुठभेड़ में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियारों की बरामदगी के मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है। अपर जिला जज-27 कमलेश कुमार मौर्य की अदालत ने आयुध अधिनियम के तहत दो आरोपियों को सात-सात साल की सजा और दो को ढाई-ढाई साल की सजा सुनाई है। अदालत के फैसले के अनुसार, मंगलपुर निवासी संजय सिंह परिहार उर्फ टिंकू और रसूलाबाद निवासी रामजी उर्फ राधे कश्यप को सात-सात साल की कैद के साथ क्रमशः 10 हजार और 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, रूरा निवासी अभिनव तिवारी उर्फ चिंकू और मंगलपुर के शुभम पाल को ढाई-ढाई साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
चारों आरोपियों ने हथियारों को छिपाने और फरार कराने में की थी मदद
अभियोजन के मुताबिक, इन चारों आरोपियों ने बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे और उसके साथियों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों को छिपाने और उन्हें फरार कराने में मदद की थी। घटना के करीब छह महीने बाद जब इन्हें लगा कि पुलिस की सक्रियता कम हो गई है, तो इन्होंने कुछ हथियार मध्य प्रदेश में बेच दिए, जबकि कुछ को बेचने की तैयारी चल रही थी। एक मार्च 2021 को इन हथियारों की बिक्री के लिए सौदा भी तय किया गया था। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ ने भौंती-पनकी क्षेत्र में अंडरपास के पास चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए। इनमें ऑटोमैटिक कारबाइन मशीन गन, विदेशी राइफल, देसी बंदूक, रिवॉल्वर, तमंचे और सैकड़ों कारतूस शामिल थे।
आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज हुए थे मुकदमे
चारों के खिलाफ पनकी थाने में आर्म्स एक्ट के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की, जिसके बाद सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह पेश किए। इन्हीं के आधार पर अदालत ने चारों को दोषी करार दिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए सजा में नरमी की अपील की। हालांकि, सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपियों के पास किसी भी हथियार का लाइसेंस नहीं था और उनका अपराध केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि शासन और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला है। इस आधार पर कड़ी सजा की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
2 जुलाई 2020 को हुआ था देश दहलाने वाला बिकरू कांड
गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई को लेकर हाईकोर्ट भी सख्त रहा है। देरी को लेकर सवाल उठने पर अदालत ने पुलिस कमिश्नर और डीजीसी को तलब किया था। वहीं, मुख्य आरोपी संजय सिंह परिहार की जमानत याचिका तीन बार खारिज की जा चुकी थी। बता दें कि 2 जुलाई 2020 को कानपुर देहात के बिकरू गांव में विकास दुबे गैंग ने घात लगाकर हमला करते हुए आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। बाद में विकास दुबे समेत कई आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे।