कौशांबीः चंद पैसों के लिए चल रहा था फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का बड़ा गिरोह, पुलिस ने सेंधमारी करते हुए 5 शातिरों को किया गिरफ्तार

डिजिटल डेस्क- कौशांबी जिले में सरकारी दस्तावेजों के साथ बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। भरवारी कस्बे में चल रहे सहज जन सेवा केंद्र से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का पूरा रैकेट उजागर हुआ। पुलिस ने जांच के बाद केंद्र संचालक मनीष कुमार समेत पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला कोखरज थाना क्षेत्र के भरवारी कस्बे का है। आरोप है कि सहज जन सेवा केंद्र संचालक मनीष कुमार रुपये लेकर जन्म प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से जारी करता था। यह मामला तब सामने आया जब काकराबाद गांव निवासी अब्दुल नादिर अपने बच्चों के आधार कार्ड बनवाने के लिए सिराथू तहसील पहुंचे। वहां जांच के दौरान अधिकारियों ने बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र को फर्जी पाया।

केंद्र संचालक की मिलीभगत से बनाए जा रहे थे फर्जी प्रमाणपत्र

इसके बाद स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि सिर्फ नादिर के बच्चों के ही नहीं, बल्कि कई अन्य बच्चों जैसे अनन्या, दिव्यांशी, सलोनी, अर्चना, राधिका और अन्य के भी जन्म प्रमाण पत्र इसी केंद्र से फर्जी तरीके से बनवाए गए थे। इस मामले में पीड़ित ने तहरीर दी और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए केंद्र संचालक मनीष कुमार और उसके सहयोगियों सोनू, इरशाद, मोनू समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मुकदमा दर्ज होते ही आरोपी केंद्र बंद कर फरार हो गए थे। लेकिन पुलिस ने जांच के दौरान भरवारी कस्बे के पास ही सभी आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया। फिलहाल, आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि वे इस रैकेट के पूरे नेटवर्क और फर्जी प्रमाण पत्रों के दुरुपयोग की पूरी पड़ताल कर रहे हैं।

रैकेट का इतिहास खंगालने में जुटी पुलिस

कौशांबी में सरकारी दस्तावेजों के फर्जीकरण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सिर्फ फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और पहचान के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मुद्दा बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेज न केवल कानूनी अपराध हैं, बल्कि समाज में विश्वास और प्रशासनिक सिस्टम को भी कमजोर करते हैं। पुलिस और प्रशासन अब पूरे रैकेट की तह तक जाने के प्रयास कर रहे हैं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि केंद्र संचालक और उनके सहयोगी कितने बच्चों के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर चुके हैं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल थे और कितनी बड़ी राशि का लेन-देन हुआ।

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