शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के कानपुर में जिला अधिकारी के जनता दरबार में गुरुवार को एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला, जब एक महिला अपने पालतू कुत्ते को वापस पाने के लिए फूट-फूटकर रोने लगी। महिला हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए सिर्फ एक ही गुहार लगा रही थी— “साहब, मेरा मोंटी मुझे वापस दिला दीजिए, वह मेरे बेटे जैसा है।” महिला की आंखों से बहते आंसू और उसकी दर्दभरी बातों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। महिला की शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने पूरे मामले को समझा और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएम के आदेश के बाद देर शाम डॉग हाउस से महिला का पालतू कुत्ता ‘मोंटी’ उसे सौंप दिया गया। अपने मोंटी को वापस पाकर महिला की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
एनजीओ ने वापस देने से कर दिया इंकार
पीड़ित महिला फरहा कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। फरहा ने बताया कि मोंटी उसके साथ 7 जुलाई 2025 से परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। मोंटी जन्मजात विकलांग है और लकवाग्रस्त भी है, इसके बावजूद फरहा और उसका परिवार उसे बेटे की तरह पालता आया है। उसके इलाज के लिए परिवार ने कई नामी पशु चिकित्सकों को दिखाया था, जिनके सभी मेडिकल दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। फरहा ने बताया कि 18 दिसंबर को उन्होंने एक एनजीओ के माध्यम से मोंटी को गोद दिया था। शर्त यह थी कि मोंटी को केवल तीन दिन के फॉस्टर के लिए छपेड़ा पुलिया स्थित डॉग हाउस में रखा जाएगा। लेकिन 21 दिसंबर को जब फरहा मोंटी को लेने पहुंची तो डॉग हाउस ने बहाने बनाकर उसे सौंपने से इनकार कर दिया।
डीएम ने दिए जांच के आदेश, 4 घंटे बाद परिवार को वापस मिल गया मोंटी
महिला ने आरोप लगाया कि मोंटी के गुप्त अंगों में चोट के कारण खून बह रहा था और उसने डॉग हाउस से उसे वापस ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन फिर भी उसे लौटा नहीं गया। 30 दिसंबर को दोबारा पहुंचने पर भी मोंटी देने से मना कर दिया गया, जिससे फरहा और उसका पूरा परिवार टूट गया। आखिरकार परेशान होकर फरहा जिलाधिकारी के जनता दरबार में पहुंची और रोते हुए अपनी पीड़ा सुनाई। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए और मोंटी को उसके परिवार को सौंपने का निर्देश दिया। डीएम के इस फैसले से फरहा का पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। डीएम के आदेशों की पालना करते हुए अधिकारियों ने जांच की और 4 घंटे के भीतर ही एनजीओ से डॉग को लाकर परिवार को सौंप दिया। फरहा ने कहा कि “आज मुझे मेरा बेटा वापस मिल गया है।” यह मामला न सिर्फ एक महिला और उसके पालतू के भावनात्मक रिश्ते की कहानी है, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता और इंसानियत की भी मिसाल बन गया है।