शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के उरई के सूर्यनगर का रहने वाला एक साधारण युवक आज देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन किसी उपलब्धि के कारण नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाले किडनी तस्करी के काले कारोबार की वजह से। 12 साल पहले घर छोड़ने वाला आठवीं पास शिवम अग्रवाल अब पुलिस की गिरफ्त में है, और उसकी गिरफ्तारी के बाद हुए खुलासों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। शिवम की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। मोहल्ले के लोगों के मुताबिक, वह खुद को कानपुर का बड़ा डॉक्टर बताता था और जब भी बाहर निकलता, तो सोने की मोटी चेन, कड़ा और अंगूठियों से लदा रहता था। उसके पास तीन लग्जरी कारें थीं और उसकी लाइफस्टाइल देखकर किसी को शक नहीं होता था कि वह एक संगठित अपराध से जुड़ा है। हकीकत यह है कि शिवम सिर्फ आठवीं पास था और चिकित्सा क्षेत्र की उसे कोई औपचारिक जानकारी नहीं थी।
मदद 24X7 व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए करता था दलाली
पुलिस जांच में सामने आया है कि शिवम ने अपने इस काले कारोबार की शुरुआत बेहद चालाकी से की। उसने ‘मदद 24×7’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसका शुरुआती मकसद एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराना बताया गया। इस ग्रुप में कल्याणपुर और रावतपुर के कई अस्पताल संचालक जुड़े हुए थे। धीरे-धीरे यह ग्रुप मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के नाम पर दलाली का जरिया बन गया। इसके बाद शिवम ने टेलीग्राम पर किडनी डोनर से जुड़े ग्रुप बनाकर अपना नेटवर्क और मजबूत किया। वह कानपुर के एलएलआर (हैलेट) अस्पताल आने वाले भोले-भाले मरीजों को सस्ते और बेहतर इलाज का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। व्हाट्सएप ग्रुप में जो अस्पताल संचालक सबसे पहले प्रतिक्रिया देता, शिवम मरीज को वहीं ले जाता। इसी प्रक्रिया के जरिए वह आहुजा अस्पताल के डॉक्टर दंपती और आगे चलकर एक अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी गिरोह से जुड़ गया।
आरोपी ने तीन शादियां की, दो पत्नियां छोड़ गईं
शिवम का निजी जीवन भी उतना ही उलझा हुआ रहा है। घर छोड़ने के बाद उसने तीन शादियां कीं, जिनमें से दो पत्नियां उसे छोड़ चुकी हैं। फिलहाल वह अपनी तीसरी पत्नी के साथ कानपुर में रह रहा था। उरई स्थित उसका पैतृक घर आज भी जर्जर हालत में है, जहां उसकी वृद्ध मां ममता देवी और 18 वर्षीय बहन रहती हैं। दोनों ही उसके इस काले कारोबार से पूरी तरह अनजान थीं। बेटे की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही उसकी मां बदहवास हालत में कानपुर पहुंची। जो लोग कभी उसकी रईसी और ठाठ-बाट के कायल थे, अब सच्चाई सामने आने के बाद चुप्पी साधे हुए हैं। एक स्थानीय कारोबारी ने बताया कि उसकी आलीशान जिंदगी देखकर किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह सब मासूम लोगों की किडनी के सौदों से कमाया गया है।