कानपुर में पहली बार ‘साइलेंस जोन’ लागू, हृदय रोग संस्थान के पास हॉर्न बजाया तो लगेगा ₹1000 का जुर्माना

शिव शंकर सविता- कानपुर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है। शहर में पहली बार ‘साइलेंस जोन’ की व्यवस्था लागू की गई है, जिसकी शुरुआत जीटी रोड पर न्यू जीटी नर्सिंग होम से लेकर गोल चौराहे तक 500 मीटर के दायरे में की गई है। इस क्षेत्र में अब अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और नियम तोड़ने वालों पर ₹1000 का चालान किया जाएगा। यह पहल खासतौर पर अस्पताल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। अक्सर देखा जाता है कि व्यस्त सड़कों पर लगातार बजते वाहनों के हॉर्न से मरीजों को काफी परेशानी होती है, खासकर हृदय रोग और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को। ऐसे में यह साइलेंस जोन उनके लिए राहत लेकर आया है।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत हुआ लागू

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि यह व्यवस्था फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। अगर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला, तो भविष्य में इसे शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने यातायात पुलिस को निर्देश दिए हैं कि इस क्षेत्र में नो-हॉर्न नियम का सख्ती से पालन कराया जाए। जो भी वाहन चालक बिना वजह हॉर्न बजाते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ तत्काल चालान की कार्रवाई की जाएगी। साइलेंस जोन को प्रभावी बनाने के लिए न्यू जीटी नर्सिंग होम से लेकर गोल चौराहे तक ‘नो-हार्न प्लीज’ के संकेतक बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि लोगों को नियमों की जानकारी मिल सके और वे खुद भी सतर्क रहें। इसके अलावा, इस पूरे इलाके में पुलिसकर्मियों की विशेष तैनाती की जाएगी, जो नियमों के पालन पर नजर रखेंगे।

चलेगा विशेष जागरूकता अभियान

डीसीपी ट्रैफिक रवींद्र कुमार ने बताया कि इस पहल के तहत केवल सख्ती ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, जिससे लोग खुद इस नियम का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने इस कदम का खुलकर स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे न केवल अस्पताल के आसपास का वातावरण शांत होगा, बल्कि यातायात अनुशासन में भी सुधार आएगा। कई लोगों ने कहा कि अगर यह व्यवस्था सफल रहती है, तो इसे पूरे शहर में लागू किया जाना चाहिए।

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