शिव शंकर सविता- कानपुर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर लगने वाले पारंपरिक मेलों को लेकर विवाद सामने आया है। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों तपेश्वरी देवी, बारादेवी मंदिर, आशादेवी मंदिर और जंगली देवी मंदिर में लगने वाले मेलों में दुकानों को लेकर बजरंग दल ने कड़ा विरोध जताया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मेलों में अन्य समुदाय के लोगों द्वारा दुकानें लगाए जाने से धार्मिक माहौल प्रभावित हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर संगठन ने पांच दिन पहले पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन भी सौंपा था, जिसमें इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
धार्मिक पवित्रता भंग करने का लगाया आरोप
बजरंग दल के कार्यकर्ता शिवम सोनकर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सुनियोजित तरीके से मेले में आकर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ बदसलूकी और धार्मिक स्थल की पवित्रता भंग करने जैसी घटनाओं की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब कथित तौर पर बीती रात 15-20 लोगों के एक समूह ने हिंदू व्यापारियों की दुकानों को हटाने की कोशिश की और उन्हें धमकियां दीं। इस घटना के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई, जिसे पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर नियंत्रित किया।
सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त पुलिसबल तैनात
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों की आस्था संबंधित धार्मिक परंपराओं में नहीं है, उन्हें ऐसे मेलों में व्यापार करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से इस संबंध में स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। वहीं, प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और मेला शांतिपूर्ण तरीके से संचालित हो रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी समुदायों से आपसी भाईचारा बनाए रखने और धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की अपील की गई है।